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एनपीए घटाने पर आरडीए नेरचौक भी खफा

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नेरचौक (मंडी)। पंजाब वेतन आयोग की ओर से नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस 25 से 20 फीसदी करने से प्रदेश के डॉक्टरों ने पंजाब राज्य के चिकित्सकों का समर्थन किया है। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) नेरचौक ने फैसला लिया है कि आगामी संघर्ष प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के साथ मिलकर किया जाएगा। आरडीए अध्यक्ष डॉ. विशाल जंवाल ने बताया कि वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार डॉक्टरों का नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस 25 से कम कर 20 फीसदी किया है।
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इसे मूल वेतन में नहीं जोड़ा गया है। इससे चिकित्सकों को वित्तीय नुकसान होगा। इसके चलते आरडीए नेरचौक ने पंजाब चिकित्सक संघ के समर्थन में सोमवार से विरोध करने का फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्ज एसोसिएशन भी इस मामले पर पंजाब चिकित्सक संघ के साथ है।
आरडीए नेरचौक सोमवार से काले बिल्ले लगाकर अपना रोष व्यक्त करेगी। महासचिव डॉ. रोशन ठाकुर सहित अन्य तमाम पदाधिकारियों का कहना है कि पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों को दुरुस्त करने की जरूरत है। इसमें डॉक्टरों का एनपीए पहले की तर्ज पर 25 फीसदी होना चाहिए और इसे मूल वेतन में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि डॉक्टरों के हितों की रक्षा हो सके।
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अध्यक्ष डॉ. विशाल जंवाल का कहना है कि कोरोना काल में डॉक्टरों ने जहां अपनी जान पर खेलकर मरीजों की जान बचाई है वहीं दूरदराज के इलाकों में डॉक्टर अपनी सेवाएं देकर लोगों को जीवन दे रहे हैं। बावजूद इसके पंजाब सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशों पर मुहर लगाई जोकि डॉक्टरों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रही है।
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उन्होंने मांग की है कि डॉक्टरों के मूल वेतन में 25 फीसदी एनपीए जोड़ा जाए अन्यथा पंजाब चिकित्सक संघ के साथ मिलकर डॉक्टर संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
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