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Mandi News: उल्टी-दस्त, बुखार और आई फ्लू ने जकड़े लोग, अस्पतालों में बढ़ी भीड़

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जोगिंद्रनगर (मंडी) । क्षेत्र में उल्टी, दस्त, तेज बुखार के अलावा आई फ्लू के मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। गंभीर मरीजों को उपचार दिलाना भी डॉक्टरों के लिए चुनौती बना हुआ है अस्पतालों में रोज भारी भीड़ जुट रही है। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में मंगलवार को शिशु और गायनी ओपीडी में मरीजों कतारें लगी रहीं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए इस दौरान पूरा दिन इंतजार करना पड़ा। रोजाना यहां करीब चार सौ मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 50 फीसदी मरीज शिशु और गायनी की ओपीडी के होते हैं। अस्पताल में एक शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक रोजाना 150 के करीब बाल रोगियों को उपचार दिला रहे हैं। इनके पास अस्पताल के एसएमओ का कार्यभार भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से सौंपा गया है। कार्यालय के अतिरिक्त कामकाज के चलते जब शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक को स्वास्थ्य विभाग की बैठकों और अन्य कार्यों के लिए जाना पड़े तो मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ रहा है। ऐसे में एक और शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग उठने लगी है। सौ बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल में गायनी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की बात करें तो यहां दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई है। बावजूद इसके भी उपचार के लिए सुबह साढ़े नौ बजे अस्पताल पहुंच रही महिलाओं को दोपहर तीन बजे तक भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। जोगिंद्रनगर अस्पताल के एसएमओ डाॅ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि मानसून सीजन में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इन्हें बेहतर उपचार दिलाने के लिए स्थानीय अस्पताल के चिकित्सक अपनी सेवाओं का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से कर रहे हैं।
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मानसून के सीजन में अधिक बढ़ रहे मरीज
मंगलवार को लडभड़ोल में भी मरीजों की भीड़ के आगे विभाग के प्रबंध छोटे पड़ गए। मानसून सीजन में विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त होकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी खली। चौंतड़ा अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक चिकित्सक हर रोज सौ से अधिक मरीजों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है, लेकिन चार बजे के बाद अस्पताल में ताला लटक जाने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जोगिंद्रनगर, बैजनाथ के अस्पतालों में दौड़ लगानी पड़ रही है, जबकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से लिखी जा रही अधिकांश दवाएं उपमंडल के स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों में न मिलने पर मरीजों को निजी दुकानों से भी खरीद करनी पड़ रही है।
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