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Mandi News: जंजैहली में आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जूझ रहे मरीज

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थुनाग (मंडी)। सराज में आपदा की मार झेल रहे ग्रामीणों को अब स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी भारी पड़ रही है। जंजैहली सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने और अल्ट्रासाउंड की सुविधा न मिलने से मरीजों को नेरचौक या मंडी जाना पड़ रहा है। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं लेकिन वह आपदाग्रस्त गांवों में जा रहे हैं। इस कारण अस्पताल में कुछेक चिकित्सक ही मिल रहे हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी नहीं है।
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नीरत राम की कहानी रोंगटे खड़े कर देती है। दस दिन तक असहनीय दर्द सहने के बाद उन्होंने 16 किलोमीटर पैदल चलकर पांच घंंटे में जंजैहली अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड की सलाह दी, लेकिन यह सुविधा न होने से उन्हें मंडी रेफर किया गया। नरेंद्र, चेतन, उर्मिला और सागरू देवी जैसे मरीज मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और चाइल्ड स्पेशलिस्ट की कमी से त्रस्त हैं। गर्भवती महिलाएं बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर नेरचौक और मंडी पहुंच रही हैं।
स्थानीय निवासी नरेंद्र का कहना है कि नेता आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं। मरीजों की जान की कीमत कोई नहीं समझता। आपदा में सबसे ज्यादा जरूरत स्वास्थ्य सुविधाओं की है, जो नहीं मिल रही। मरीज प्रारंभिक जांच के बाद नेरचौक, मंडी या सुंदरनगर रेफर किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी ने स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल के सामने यह मुद्दा उठाया।
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20पंचायतों की आबादी करती है अस्पताल पर निर्भर
सिविल अस्पताल जंजैहली पर 20 पंचायतों की आबादी निर्भर करती है। सामान्य दिनों में 300-400 मरीजों की ओपीडी वाला यह अस्पताल अब आपदा में 150-200 मरीजों को भी संभाल नहीं पा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात इतने भयावह हैं कि लोग नेरचौक और मंडी जाने से डर रहे हैं।
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आपदा में लोगों के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। अस्पताल में मरीजों का हरसंभव उपचार किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिकित्सकों की टीमें पहुंच कर लोगों को राहत प्रदान कर रही है।
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-डाॅ. पुष्पराज. खंड चिकित्सा अधिकारी, जंजैहली
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