जिला परिषद की अध्यक्ष कुर्सी पर काबिज होने के लिए माकपा और निर्दलीय चुनाव जीते प्रत्याशियों पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है। हालांकि इस बार कांग्रेस ने 17 सीटें जीत कर जिला परिषद में वापसी है। वहीं भाजपा को नौ सीटों का नुकसान हुआ है, लेकिन अध्यक्ष की कुर्सी के लिए कांग्रेस को भी माकपा व निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थन लेना पड़ेगा। 12 जनवरी को नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों को शपथ दिलवाई जाएगी।
शपथ के बाद ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक निर्धारित की जाएगी। जिला परिषद मंडी के चुनाव में कांग्रेस ने शानदार वापसी की है। 17 वार्डों से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कुर्सी के लिए कांग्रेस व भाजपा जोड़-तोड़ में जुट गई है। इस बार जिला परिषद अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित है। आरक्षित 18 वार्डों से महिलाएं जिला परिषद सदस्य चुनीं गई।
हालांकि अभी तक अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए किसी भी विजयी महिला प्रत्याशी का नाम सार्वजनिक नहीं हुआ है। अध्यक्ष पद के दावेदारों ने अपनी गोटियां फिट करने में लग गए हैं। जिप अध्यक्ष पद के लिए बहुमत साबित करना होगा। कांग्रेस और भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। जिससे माकपा और निर्दलीय उम्मीदवारों का अध्यक्ष बनाने में अहम रोल होगा। माकपा और निर्दलीय जीत कर आए प्रत्याशी किसे अपना समर्थन देते हैं यह अभी तक तय नहीं है।
वर्तमान जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा ने जिला परिषद अध्यक्ष खीरामणि को नगवाईं वार्ड पार्टी प्रत्याशी घोषित नहीं किया, इसके बाद भी खीरामणि ने भी पार्टी के हित में चुनाव नहीं लड़ा। पिछले चुनाव में 22 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा ने कब्जा किया था।