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Mandi News: 58 विद्यार्थियों वाले प्राथमिक स्कूल को बंद करने का फरमान, अभिभावकों में आक्रोश

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जोगिंद्रनगर में करीब सदी पुराने स्कूल को डी-नोटिफाई करने की अधिसूचना पर उठे सवाल
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अभिभावकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। 58 विद्यार्थियों से गुलजार प्राथमिक स्कूल को बंद करने की अधिसूचना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जोगिंद्रनगर में करीब सदी पुराने इस स्कूल को डी-नोटिफाई करने का फरमान जारी होने से अभिभावकों में आक्रोश है। अभिभावकों ने आदेश वापस नहीं लेने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
प्राथमिक जिला शिक्षा संघ के महासचिव अतुल लखनपाल के अनुसार स्कूल में 32 छात्राएं और 26 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के दो मंजिला भवन में छह कमरे हैं और विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा की सुविधा से स्मार्ट कक्षाएं भी उपलब्ध हैं। सुविधाओं के चलते स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
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प्राथमिक शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष बलवीर ने कहा कि बिना जमीनी स्तर पर पड़ताल किए स्कूल को डी-नोटिफाई करने का आदेश जारी करना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। केंद्रीय मुख्य शिक्षक दुनी चंद ने कहा कि 58 विद्यार्थियों वाले स्कूल को किस आधार पर बंद करने का निर्णय लिया गया है, इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों से ली जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले इसी परिसर में संचालित राजकीय बाल पाठशाला के नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को सीबीएसई स्कूल में मर्ज किया गया था। अभिभावकों के विरोध के बाद अगस्त में स्कूल में प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के तहत दोबारा पढ़ाई शुरू हुई थी। अब प्राथमिक पाठशाला को बंद करने की अधिसूचना से लोगों में नाराजगी है।

प्रदेश में पांच से कम विद्यार्थियों वाले प्राथमिक स्कूलों को डी-नोटिफाई करने का नियम लागू किया गया है। ऐसे में 58 विद्यार्थियों वाले स्कूल को बंद करने का आदेश स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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राजनीतिक द्वेष से संस्थान बंद करने का आरोप
भाजपा विधायक प्रकाश राणा ने आरोप लगाया कि जोगिंद्रनगर में राजनीतिक द्वेष के चलते शैक्षणिक और विकासात्मक संस्थानों को बंद किया जा रहा है। कहा कि विधानसभा सत्र में वह इस मामले को प्राथमिकता से उठाएंगे। वहीं, कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर ने कहा कि शिक्षा विभाग और सरकार से स्कूल को डी-नोटिफाई करने के कारणों की जानकारी लेने के बाद मुख्यमंत्री से पत्राचार किया जाएगा।
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