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Mandi News: अब मुफ्त नहीं मिलेगी ओपीडी की पर्ची, 10 रुपये शुल्क लागू

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क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में पर्ची बनवाने कतारों में खडे लोग। संवाद
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आरकेएस के फैसले के बाद क्षेत्रीय अस्पताल में शुरू हुई व्यवस्था
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रखरखाव और उपकरणों की खरीद पर खर्च होगी राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में अब ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को 10 रुपये शुल्क देना होगा। अस्पताल प्रबंधन ने यह व्यवस्था रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद लागू की है। पर्ची शुल्क से प्राप्त राशि अस्पताल के रखरखाव, मरम्मत कार्य और आवश्यकतानुसार नए उपकरणों की खरीद पर खर्च की जाएगी। नई व्यवस्था को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
कुछ लोगों का कहना है कि 10 रुपये का शुल्क अधिक नहीं है और इससे अस्पताल की सुविधाओं में सुधार होगा। उनका तर्क है कि जब लोग निजी अस्पतालों में पर्ची के लिए सैकड़ों रुपये खर्च करते हैं, तो सरकारी अस्पताल में 10 रुपये देना उचित है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि सरकार पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पर्ची की सुविधा निशुल्क ही रहनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि शुल्क वसूली से भविष्य में मरीजों और कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि आरकेएस की बैठक में ओपीडी पर्ची पर 10 रुपये शुल्क लेने का निर्णय लिया गया था। इस राशि से अस्पताल की सुविधाओं में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
बॉक्स
जो मरीज निजी अस्पतालों में पर्ची के लिए 400-500 रुपये खर्च कर सकते हैं, वे सरकारी अस्पताल में 10 रुपये भी दे सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने अच्छी पहल की है। -प्रोमिला शर्मा, निवासी मंडी
सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में मरीजों से पर्ची के लिए 10 रुपये लेना उचित नहीं है। पहले की तरह यह सुविधा निशुल्क ही रहनी चाहिए। -ज्ञान चंद, निवासी सात मील, मंडी
नई व्यवस्था का स्वागत है, लेकिन एक पर्ची कितने दिनों तक मान्य रहेगी, इसकी जानकारी भी अस्पताल प्रबंधन को देनी चाहिए। लोगों को पहले इस संबंध में जागरूक करना जरूरी है। -देविंद्री देवी, निवासी देवधार
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10 रुपये कोई बड़ी राशि नहीं है। हालांकि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, उन्हें शुल्क में छूट मिलनी चाहिए। आखिर यह राशि अस्पताल के विकास और सुविधाओं पर ही खर्च होगी। -सुमित शर्मा, महाजन बाजार, मंडी
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