मंडी। पिछले साल से मंडी जिला लगातार आपदाओं का सामना कर रहा है। ब्यास नदी और सुकेती, सीर और ज्यूणी खड्डों के कारण क्षेत्र में हर समय भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
पिछले साल की तरह इस बार भी ब्यास नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बुधवार रात को हुई भारी बारिश के बाद वीरवार को मंडी शहर के कुछ घरों को खाली करवाना पड़ा। वहीं, पंडोह बाजार में भी जलभराव हो गया।
पिछले साल ब्यास नदी ने मंडी शहर के पास एनएच-21 को कई स्थानों पर नष्ट कर दिया था। इस साल भी नदी की तेज जलधारा ने एनएच की सुरक्षा दीवारों और डंगों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। पंडोह से लेकर मंडी तक एनएच पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। जिला के कई स्थानों पर पिछले साल भूस्खलन से गिरे मकान अभी तक नहीं बन पाए हैं।
पंडोह के देवरी में पिछले साल क्षतिग्रस्त हुआ मकान इस बार जमींदोज भी हो गया। ऐसे में स्थानीय लोग अब भीषण बरसात से अपने घरों के और अधिक नुकसान से डरे हुए हैं। वीरवार को ज्यूणी और सुकेती खड्ड में जलस्तर सामान्य रहा, जिससे मंडी शहर को बड़ी आपदा से राहत मिली। यदि इन खड्डों का जलस्तर बढ़ता तो ब्यास नदी के किनारे स्थित घरों के बहने का खतरा था।
उधर, सरकार और प्रशासन का कहना है कि आपदा से निपटने के लिए सभी विभाग सतर्क हैं। सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। इसके बावजूद आपदा प्रभावित लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि इस बार पिछली बरसात जैसी स्थिति न हो।
हमेशा खतरे की जद में रहने वाले स्थान
मंडी जिले में कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां पिछली बरसात के जख्म फिर से हरे हो गए हैं। इनमें पंडोह बाजार, मंडी से सरकाघाट का भांबला, सरकाघाट से धर्मपुर और मंडी तक के क्षेत्र में भूस्खलन होने का खतरा बना हुआ है। सिराज क्षेत्र, चौहार घाटी और बल्ह क्षेत्र में भी बरसात ने पिछले साल आपदा में मिले जख्मों को हरा करना शुरू कर दिया है।