जोगिंद्रनगर आयुर्वेदिक अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार को मंजूरी
रोगी कल्याण समिति की बैठक में फैसला
मरीज हित के कार्यों पर 2.62 लाख रुपये खर्च करने की स्वीकृति
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडलीय आयुर्वेदिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में पंचकर्म पद्धति से उपचार ले रहे मरीजों को राहत मिली है। रोगी कल्याण समिति ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पंचकर्म उपचार के निर्धारित शुल्क में कोई वृद्धि नहीं करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अस्पताल में उपचार सुविधाओं के विस्तार और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। शुक्रवार को एसडीएम मनीश चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित रोगी कल्याण समिति की बैठक में मरीज हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने पंचकर्म अनुभाग के संचालन और आवश्यक कार्यों के लिए 30 हजार रुपये खर्च करने की स्वीकृति प्रदान की। वहीं अस्पताल की आईपीडी और ओपीडी में आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता, बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन, लेखा परीक्षण, प्रयोगशाला के जीर्णोद्धार और अन्य सुविधाओं के लिए 2.62 लाख रुपये खर्च करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
बैठक में आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी डॉ. संदीप जम्वाल, उपमंडलीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. रक्षक पाल और डॉ. गौरव ने अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं और पूर्व में किए गए खर्च का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने उपचार व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न प्रस्ताव भी रखे, जिन्हें समिति ने स्वीकृति प्रदान कर दी। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने अस्पताल परिसर में मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में सुधार के सुझाव दिए। परिसर में बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर लाइटें स्थापित करने की मांग भी उठाई गई।
पंचकर्म उपचार के लिए निर्धारित शुल्क
अभ्यंग (एकांग), स्वेदन (एकांग), कटिवस्ति, अनुवस्ति, ग्रीवावस्ति, अक्षितर्पण, शिरोभ्यंग, मात्रावस्ति और स्नेहध्यान के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित है। वहीं, अभ्यंग (सर्वांग) और स्वेदन (सर्वांग) के लिए 150 रुपये शुल्क देना होगा। शिरोधारा, कार्यसेक और षष्टिशाली पिंड स्वेदन के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित है। नस्य चिकित्सा और शिरोवस्ति के लिए 75 रुपये शुल्क देना होगा।