इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से चौहदवें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार सभी विकास कार्य पंचायतों के माध्यम से करवाए जाएंगे और विकास कार्यों के लिए धन राशि सीधे पंचायतों को प्रदान की जाएगी।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे जिम्मेवारी के साथ अपने क्षेत्र के विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करें और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिल कर इन्हें कार्य रूप प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के साथ साल में कम से कम तीन बैठक जरूर करेंगे, ताकि उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके और ज्यादातर समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत समस्याओं से संबंधित मामले उनके समक्ष इन बैठकों में ला सकते हैं। प्रदेश सरकार त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में प्रयासरत है और तीनों स्तरों पर सभी को शक्तियां प्रदान करने पर विचार कर रही है।
प्रदेश में पंचायत घरों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है और पंचायतें इसके लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि प्रत्येक वर्ष मनरेगा के तहत संपर्क सड़कों की मरम्मत का प्रस्ताव डालें ।
बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष चंपा ठाकुर ने कहा कि विकास की राशि सीधे पंचायतों को मिलने से पंचायतें सुदृढ़ होंगी। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतीराज ढंाचे में आपसी समन्वय से ही विकास कार्य संभव हो सकते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक पंचायत में जिला परिषद सदस्यों की भी विकास कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर, लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता डीसी यादव, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अधिशाषी अभियंता देसराज आदि विभागों के अधिकारी मौजूद थे।