शिवरात्रि महोत्सव के देव समागम में लगा देवी देवताओं के ‘कुंभ’ में सोमवार को चौहाटा जातर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। अगली शिवरात्रि तक एक-दूसरे से विदा लेते समय देव मिलन के अलौकिक नजारे देख कर लोग भी भावुक हो गए। देवताओं की विदाई के साथ एक सप्ताह तक भक्तिमय माहौल में डूबी मंडी बिना देवताओं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के सुनापन लगा।
देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था लेकर चौहाटा की जातर में हजारों लोगों ने अपने व परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद लिया। देव रथों के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र शहनाई, ढाले, नगाड़े व रणसिंगे, करनाल की ध्वनि पर नाचते गाते देवलुओं से छोटी काशी पूरी तरह आस्था के माहौल में डूबी रही।
हजारों लोग देव मिलन के इस अद्भूत क्षणों के गवाह बने। चौहाटा में एक साथ कतारबद्ध विराजमान डेढ़ सौ से अधिक देवी-देवताओं के दर्शन के लिए सुबह सात बजे से लोगों का तांता लगने लगा था। दोपहर एक बजे के बाद देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना होने लगे थे। चढ़त चढ़ाने के साथ ही हजारों लोगों ने देवताओं से परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। देवता भी शेष देकर आशीर्वाद देते हैं।
अगले साल फिर मिलने के वायदे के साथ दोपहर 12 बजे के बाद एक-एक कर देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना हो गए। देवी-देवताओं की रवानगी से शिवरात्रि की रौनक भी साल भर के लिए समाप्त हो गई।