मंडी/सुंदरनगर। जिले में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। तीन एनएच समेत 81 मार्ग प्रभावित रहे। 155 ट्रांसफार्मर ठप रहने से 80 से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। सुंदरनगर की बीबीएमबी कॉलोनी जलमग्न हो गई।
चांबी पंचायत के जंगम बाग में निर्माणाधीन भवन के पास भूस्खलन होने से दूसरे घर में मलबा घुस गया। इसमें परिवार के 9 लोग फंस गए। 8 लोग किसी तरह निकल गए लेकिन वृद्ध महिला को कड़ी मशक्कत के बाद निकाला। इसके लिए प्रशासन को 4 जेसीबी लगानी पड़ी। बल्ह क्षेत्र भी जलमग्न रहा। मंडी और बल्ह में करीब आधा दर्जन स्कूलों में पानी आने से अवकाश करना पड़ा। भंगरोटू स्कूल में पानी आने से सामान पूरी तरह से भीग गया।
डीएवी सुंदरनगर का मार्ग बंद रहा। डीएवी स्कूल नेरचौक का डंगा भी बह गया। बल्ह में कई दुकानों और मकानों में बारिश का पानी घुसने से तबाही हुई है। जिले के तीनों एनएच समेत 81 मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। देर शाम तक 53 मार्ग बहाल कर दिए गए हैं। 28 मार्ग बाधित चल रहे हैं। मंडी-कुल्लू एनएच सात मील और वैकल्पिक कटौला मार्ग कमांद के पास आठ घंटे बंद रहा।
हाईवे में फंसे लोगों को भूखे प्यासे रहना पड़ा। सात मील में वोल्वो समेत कुछ वाहन भूस्खलन की चपेट में आए हैं। यात्रियों ने भागकर जान बचाई है। पठानकोट-मंडी हाईवे सुबह 10 से दोपहर 12 और मंडी-जालंधर वाया धर्मपुर एनएच पर भी यातायात करीब पांच घंटे बंद रहा।
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ब्यास और सुकेती खड्ड में बाढ़
मंडी/नेरचौक। बारिश की वजह से ब्यास नदी का जल स्तर बढ़ गया। सुकेती खड्ड ने भी रौद्र रूप धारण किया। सुकेती खड्ड और सहायक नालों का पानी लोगों के खेतों, घरों और सड़कों पर आ गया। फसलें पानी में डूब गईं। वाहन भी फंस गए। बल्ह में प्रस्तावित एयरपोर्ट क्षेत्र जलमग्न होने के अलावा गागल, चंडयाल, भडयाल और बैहना में भी सुकेती के सहायक नालों ने भारी तबाही मचाई। वीरवार सुबह सुकेती खड्ड में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। मंडी के पंचवक्त्र मंदिर के पास ब्यास सुकेती संगम स्थल पर भारी जलभराव हो गया।
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मानसून की बारिश से 200 करोड़ का नुकसान
एडीएम मंडी अश्वनी कुमार ने कहा कि मानसून में अब तक 200 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। 140 करोड़ का नुकसान अकेले लोक निर्माण विभाग को हुआ है। इसमें डंगे, सड़कें और पुलों को नुकसान हुआ है। 50 करोड़ के करीब जलशक्ति विभाग का नुकसान आंका गया है। 30 करोड़ का नुकसान अन्य विभागों को हुआ है। लोगों की जमीनों को भी काफी नुकसान हुआ है। पैदावार बाढ़ में डूब गई है।
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