हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार सुबह 9:13 बजे रिक्टर पैमाने पर 3.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार भूकंप का केंद्र मंडी क्षेत्र में 8 किलोमीटर की गहराई पर था। झटके हल्के होने के कारण किसी प्रकार के जानमाल या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है। मंडी जिला भूकंपीय जोन-5 में आता है, जिसे भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार सुबह 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। रिक्टर पैमाने पर दर्ज इस भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। हालांकि, रविवार तक किसी जानमाल या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। यह भूकंप सुबह 9:13 बजे आया। मौसम विभाग के अनुसार, इसका केंद्र मंडी क्षेत्र में था। केंद्र 31.445 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.993 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन के भीतर 8 किलोमीटर दर्ज की गई।
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झटकों की तीव्रता कम होने के कारण स्थिति सामान्य बनी हुई है। मंडी जिला भूकंपीय जोन-5 में आता है। यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील और उच्च जोखिम वाला माना जाता है। हिमाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा हिमालयी क्षेत्र में होने के कारण भूकंपीय गतिविधियों के प्रति संवेदनशील है। प्रदेश के कई जिले जोन-4 और जोन-5 में शामिल हैं। ऐसे में भूकंपरोधी निर्माण और आपदा से निपटने की तैयारियां मजबूत रखना जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश में भूकंप का लंबा इतिहास रहा है। यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहे हैं। 4 अप्रैल 1905 का कांगड़ा भूकंप सबसे विनाशकारी माना जाता है। करीब 7.8 तीव्रता के इस भूकंप में 20 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी। कांगड़ा, धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मकान व इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके बाद 1945 में चंबा क्षेत्र में करीब 6.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। 21 अगस्त 2014 को कांगड़ा में 4.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। छोटे झटके तो अक्सर आते रहते हैं।