मंडी में हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के संगठनात्मक शिविर में मौजूद पदाधिकारी। स्त्रोत- संगठन
- फोटो : मौके पर पलटी कार को उठाती क्रेन।
मंडी। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति का दो दिवसीय संगठनात्मक शिविर मंडी में शनिवार को शुरू हुआ। शिविर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लैंगिक समानता, सामाजिक विभाजन की चुनौतियों, नशे के खिलाफ युवा बचाओ अभियान सहित संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
शनिवार को समिति के राज्य उपाध्यक्ष जीयानंद शर्मा ने जन विज्ञान आंदोलन के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर बात रखी। राष्ट्रीय स्तर से आए अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के उपाध्यक्ष डाॅ. प्रमोद गौरी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर चर्चा की। कहा कि वैज्ञानिक मानसिकता मानव मस्तिष्क की एक प्रवृत्ति है। कहा कि इस समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
इसके लिए 19वीं शताब्दी या उससे भी पहले चले नवजागरण की तरह ही पुनर्नवजागरण चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान नीति को अपनाने वाला दुनिया का पहला देश था। इसने 1958 में विज्ञान नीति को अपनाया, लेकिन आज भी नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने में हम नाकाम हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वैज्ञानिक मानसिकता को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
वरिष्ठ पत्रकार और विज्ञान कार्यकर्ता धर्म प्रकाश गुप्ता ने कहा कि विज्ञान आंदोलन का सबसे बड़ा कार्य है कि वे खुद भी सवाल करें और जनता को भी सवाल करने के लिए प्रेरित करें।
लैंगिक समानता के सत्र में राष्ट्रीय स्रोत व्यक्ति मनीषा हंस ने समाज में लैंगिक असमानता के विभिन्न पहलुओं पर बात रखी।
इस मौके पर संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं की प्रभावी भूमिका पर पूर्व सचिव भूपेंद्र सिंह और भीम सिंह ने अपनी बात रखी। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान पर जिला बाल विकास अधिकारी एनआर ठाकुर, सत्यवान पुंडीर ने विस्तार से बातचीत की। शिविर में आठ जिलों के 75 कार्यकर्ता शामिल हुए।