गोहर (मंडी)। एचपीएमसी खरीद केंद्र चैलचौक सेब सीजन में बदहाल है। टीन के शेड से बने केंद्र पर भी ताला लटका है। सेब बागवान खरीद केंद्र में ताला देख बैरंग लौट रहे हैं।
एक ओर जहां सरकार बागवान हितैषी होने का दावा करती है वहीं धरातल की सच्चाई कुछ और बयां कर रही है। एचपीएमसी के अधिकारियों का तर्क है की स्टाफ की कमी के चलते दिक्कत आ रही है। एचपीएमसी के चैलचौक स्थित खरीद केंद्र में कमरुघाटी की दर्जनों पंचायतों का सेब आता है। खरीद केंद्र में ताला लटकने से बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। चैलचौक खरीद केंद्र बंद होने से नाचन फ्रूट एंड वेजिटेबल संघ तल्ख हो गया है। संघ के अध्यक्ष बीके ठाकुर और उपाध्यक्ष प्रेम ठाकुर ने कहा है कि चैलचौक खरीद केंद्र को अगर एचपीएमसी जल्द नहीं खोलती है तो अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।
क्षेत्र के बागवान चंद्रमणी ठाकुर, देवीराम, यशवंत सिंह, मुरारी लाल, हंस राज, परमा राम, जीत कुमार, वेद प्रकाश, नंद लाल, नवीन गुरुंग, प्रेम सिंह, देवेंद्र ठाकुर, सीता राम, लाला राम, लाभ सिंह, भीम सिंह, विकास गुप्ता और महेश्वरी देवी ने बताया कि एचपीएमसी के चैलचौक खरीद केंद्र में पिछले साल भी ताले थे और इस बार भी यही ड्रामा है। बागवानों ने मांग की है कि जल्द विभाग चैलचौक केंद्र को खोले।
चैलचौक प्रभारी के पास निहरी का भी चार्ज है। चैलचौक बैठने के आदेश जारी कर दिए हैं। व्यवस्था को सुधारा जाएगा। सेब सीजन में बागवानों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
झाबर सिंह, एचमपीएमसी प्रभारी
बागवान हितैषी सरकार की जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। सेब बागवान निजी हाथों लूटने पर मजबूर हैं। सरकार के उपक्रम हांफते नजर आ रहे हैं। सरकार इस पर संज्ञान ले।
अनूप ठाकुर, बागवान चैलचौक
सेब खरीद के लिए सरकार ने एचपीएमी के तहत खरीद केंद्र जो खोले हैं। इनमें खरीद न होना दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है। बागवान इसका विरोध करते हैं। इन केंद्रों को औपचारिकता पूरा करने के लिए खोल दिया है।
मनोज ठाकुर, बागवान घ्याहन्न
सेब बागवानों को एक तरफ समर्थन मूल्य कम और दूसरे सेब खरीद केंद्रों में ताले सरकार की सोच को दर्शाती है। बागवान इसकी निंदा करते हैं। यदि केंद्र न खुला तो आंदोलन होगा।
तोम चंद, बागवान रया
सरकार को बागवानों के साथ ऐसा भद्दा मजाक नहीं करना चाहिए। एक तरफ खरीद केंद्र की सुविधा और दूसरी तरफ उसमें ताले। इससे बागवान निजी हाथों लूटने पर मजबूर हैं।
पुष्प राज, बागवान भाटकीधार