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चिंताजनक: नहीं लिया सबक... साल बाद भी सिसक रहे लोग, मानसून से पहले बढ़ी चिंता; मंडी के भेला गांव की कहानी

Sun, 31 May 2026 12:39 PM IST
Ankesh Dogra संजीव शर्मा, भेला (मंडी)।

सार

हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बालीचौकी उपमंडल के भेला गांव में तीन बार मौसम बदला पर मुसीबतें नहीं। कहीं सड़कें धंस चुकी हैं तो कहीं पहाड़ों की ढलानें अब भी अस्थिर दिखाई देती हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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भेला गांव में टिन से बनाया अस्थायी ठिकाना। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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पहाड़ों की दरारें, धंसी सड़कें, टूटे डंगे और नालों में भरा मलबा। सब यह दिखाते हैं कि पिछले साल की तबाही के बाद भी स्थायी सुधार नहीं हुआ है। लोग अभी भी अस्थायी घरों, स्कूलों और जोखिम भरी सड़कों पर निर्भर हैं। लोगों का कहना है कि चेतावनी के बावजूद करीब एक साल बाद भी सिस्टम ने सबक नहीं लिया।

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मंडी मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बालीचौकी उपमंडल के भेला गांव में तीन बार मौसम बदला पर मुसीबतें नहीं। पिछले साल मानसून ने इस गांव के 21 परिवारों की तस्वीर ही बदल दी। घर, जमीन और यादें सब कुछ मलबे में बदल गया। आज भी यहां हालात वैसे ही हैं। अस्थायी टेंट इन लोगों का घर बन गए। पहले ठंड ने सताया। गर्मी बढ़ते ही ये तंबू अब तंदूर बन गए हैं। गांव में पहुंचते ही सबसे पहले नजर टूटी और दरारों वाली जमीन पर जाती है।

कहीं सड़कें धंस चुकी हैं तो कहीं पहाड़ों की ढलानें अब भी अस्थिर दिखाई देती हैं।  प्रशासन ने शुरुआती राहत और मुआवजा तो उपलब्ध कराया, लेकिन एक साल बाद भी पुनर्वास की प्रक्रिया अधूरी है। प्रभावित परिवार फिलहाल अस्थायी तंबुओं में जीवन बिताने को मजबूर हैं। कुछ ही हफ्तों में फिर बारिश होगी। सवाल यह होगा कि  क्या ये परिवार अगला मानसून तंबू में झेलेंगे या उनके सिर पर पक्की  छत होगी।
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पैरों तले नहीं पक्की जमीन 
71 साल की बुजुर्ग प्रेमला देवी तंबू के दरवाजे पर बैठी कहती हैं - बरसात में सब चला गया। लगा था कुछ महीनों की बात होगी, लेकिन एक साल होने को आया, घर अब भी नहीं बना। अगला मानसून सिर पर है और पैरों तले पक्की जमीन तक नहीं है। 

पेड़ों की छांव ढूंढते हैं छोटे बच्चे 
पुन्नी देवी बताती हैं कि ठंड में रात काटना सबसे मुश्किल था। अब गर्मी ने इन्हीं तंबुओं को तंदूर बना दिया है। छोटे बच्चे बाहर पेड़ों की छांव ढूंढते हैं। 

घर बनाने के लिए जगह ही नहीं 
युवक नोख सिंह कहते हैं - दोपहर में तंबू के अंदर बैठना मुश्किल हो जाता है। सवाल यह है कि एक साल बाद भी लोग तंबुओं में क्यों हैं? घर बनाने के लिए जगह ही नहीं तो पैसे किस काम के।

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सभी विभागों को अलर्ट रहने के दिए गए हैं आदेश
जिला मुख्यालय में वर्कशॉप कर सभी विभागों को आपदा की स्थिति में रिस्पांस समेत अन्य मामलों के बारे में विस्तार से बताया गया है। सभी विभागों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। बीते मानसून में हुए नुकसान के बाद सड़कों व रास्तों को अस्थायी व स्थायी तौर पर बहाल किया गया है। अस्थायी हुए कार्य को स्थायी करने का कार्य जारी है। पिछली स्थितियों को देखते हुए इस बार पुख्ता तैयारी की जा रही है। लगातार कार्यों की समीक्षा की जा रही है। - अपूर्व देवगन, उपायुक्त मंडी
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