मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत भूमि अधिग्रहण के मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने मध्यस्थ का अवार्ड बरकरार रखा है।
मामले के तथ्यों के अनुसार केंद्र सरकार ने 16 फरवरी 2015 को राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के विस्तार के लिए अधिसूचना जारी की, जिसमें मंडी जिले के गांव टकोली की भूमि अधिग्रहित करने का प्रावधान था।
भूमि मालिक नर्वदा देवी और अन्य ने इस अधिसूचना के खिलाफ आपत्तियां जताईं, जिन पर सुनवाई हुई। बाद में 9 मई 2018 को संरचना मुआवजे का प्रारंभिक आदेश जारी हुआ, जिससे भूमि मालिक को 38.06 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना था। भूमि मालिक ने मुआवजे की अपर्याप्तता का दावा करते हुए मध्यस्थता के जरिये अतिरिक्त मुआवजे की मांग की, जिसके बाद 7 अगस्त 2023 को मध्यस्थ ने मुआवजा बढ़ाकर 42.42 लाख रुपये कर दिया।
एनएचएआई ने इस आदेश को चुनौती दी। अदालत में दलील दी कि मध्यस्थ ने बिना पर्याप्त सबूत के मुआवजा बढ़ाया और निजी मूल्यांकन रिपोर्ट को सही तरीके से नहीं परखा। हालांकि अदालत ने मध्यस्थ के फैसले को सही माना और कहा कि भूमि मालिक ने मुआवजे की अपर्याप्तता साबित की थी। न्यायालय ने कहा कि मध्यस्थ ने दोनों पक्षों के मूल्यांकन और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजे का निर्धारण किया है और इसे युक्तिसंगत ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि मध्यस्थता पुरस्कार के खिलाफ याचिका केवल सीमित आधारों पर स्वीकार्य होती है। ऐसे में अदालत ने इस मामले में एनएचएआई की याचिका को खारिज किया।