20 पंचायतों के लोगों को रात के समय झेलनी पड़ रही परेशानी
आपात स्थिति में मरहम पट्टी के बाद जाना पड़ रहा कांगड़ा या जोगिंद्रनगर
संवाद न्यूज एजेंसी
लडभड़ोल (मंडी)। अगर आप रात को किसी सड़क हादसे में जख्मी या बीमार होते हैं तो सिविल अस्पताल लड़भड़ोल न जाएं। यहां रात के समय चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इस कारण क्षेत्र की जनता को रात के समय उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लड़भड़ोल की 20 पंचायतों की 35 हजार आबादी की सुविधा के लिए भले ही 2019 में इसे सिविल अस्पताल का दर्जा मिल चुका है, लेकिन अभी सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है।
वर्तमान में अस्पताल दो डॉक्टरों के सहारे चल रहा है, जबकि छह पद खाली हैं। दिन में किसी तरह मरीजों को उपचार मिल रहा है, लेकिन रात होते ही स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं। रात को आपात स्थिति में उपचार स्टाफ नर्सों के ही सहारे है। ऐसे में गंभीर जख्मी मरीजों को मरहम पट्टी लगाकर कांगड़ा या जोगिंद्रनगर जाना पड़ रहा है। रात के समय डॉक्टर की तैनाती की मांग लोग लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन इसे लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा।
स्थानीय निवासी सुरेंद्र सोनी, हरनाम सिंह, अमित, रोहित कुमार, अरुण कुमार और जिला परिषद सदस्य ममता भाटिया ने बताया कि रात के समय डॉक्टरों की नियुक्ति न होने से क्षेत्रवासी लंबे समय से परेशान हैं। सरकार के नुमाइंदों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक मामला लाया गया है, लेकिन कुछ नहीं हो पाया।
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बीएमओ की तैनाती के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
सिविल अस्पताल में भले ही बीएमओ की तैनाती हो गई है, लेकिन व्यवस्थाएं अभी तक नहीं सुधर पाई हैं। रात के समय की ओपीडी की बात की जाए तो पिछले सितंबर माह में 72 मरीजों की ओपीडी हुई है। इसके अलावा दोगुना मरीज उपचार न मिलने पर बैरंग लौट गए। अस्पताल के बीएमओ डॉ. लाल सिंह ने बताया कि मामला ध्यान में है। स्टाफ की दिक्कत के चलते ऐसी परेशानी आ रही है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को लिख दिया गया है।
कोट्स
सिविल अस्पताल लडभड़ोल में मरीजों को रात के समय सुविधा न मिलना चिंता का विषय है। इस संबंध में सीएमओ मंडी से बात की जाएगी। इसके बावजूद उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
-प्रकाश राणा, विधायक, जोगिंद्रनगर
कोट्स
लडभड़ोल अस्पताल में रात्रि सेवाओं को लेकर सीएमओ मंडी से बात की जाएगी। स्थानीय डॉक्टर को लाने का प्रयास भी किया जाएगा। रात के समय स्वास्थ्य सेवाएं न मिलना चिंता का विषय है।
-जीवन ठाकुर, सचिव, प्रदेश कांग्रेस