सुंदरनगर (मंडी)। प्रदेश की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना कोल बांध परियोजना से लेकर बल्हघाटी को सींचने तक कई प्रोजेक्ट में काम कर चुके नरेंद्र खरबंदा आज भी इंजीनियर और समाज सेवा में बेमिसाल है।
पाकिस्तान के कोटली में पैदा हुए खरबंदा ने आठ साल की उम्र में बंटवारे का गम झेला है। उसी बंटवारे ने उनके परिवार को सुंदरनगर पहुंचा दिया। अपनी मेहनत के दम पर 1962 में प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग में बतौर कनिष्ठ अभियंता अपनी नौकरी शुरू की। करीब 36 साल सरकारी सेवाएं देने के बाद वह अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवा काल में कई उल्लेखनीय कार्य किए।
नरेंद्र खरबंदा प्रदेश के वह पहले सिविल इंजीनियर है, जिन्होंने प्रदेश सरकार की तरफ से रशियन टीम के साथ कोल बांध परियोजना का सर्वे किया था। हालांकि प्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट को लगाने में नाकाम रही। लेकिन उनके किए हुए सर्वे ने परियोजना बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। मंडी जिला के बग्गी मंडल की सबसे बड़ी सिंचाई योजना को मूर्त रूप में ढालने के लिए सहायक अभियंता के रूप में अहम भूमिका निभाई। बीएसएल परियोजना की नहर के पानी से आज भी बल्ह का सैकड़ों हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है।
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सुंदरनगर के मनमोहन सिंह
जिस तरह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह निर्वासित होकर पाकिस्तान से भारत आए थे, उसी तरह नरेंद्र खरबंदा भी पाकिस्तान से हिमाचल पहुंचे थे। नरेंद्र खरबंदा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह दिखाई देते हैं। यही वजह है कि जब वह मनमोहन सिंह की तरह स्लेटी रंग की पगड़ी पहनकर सामाजिक कार्यों में आते हैं तो उन्हें लोग प्यार से डॉ. मनमोहन सिंह कहते हैं।