करसोग (मंडी)। ऐतिहासिक नगरी पांगणा में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में मंगलवार को बाल ब्यास शशांक कृष्ण कौशल ने कहा कि पांच हजार वर्ष पूर्व धरती पर पहली बार भागवत कथा का उच्चारण हुआ।
बाल ब्यास शशांक कृष्ण कौशल ने बताया कि पुराणों के अनुसार तक्षक नाग के डसने के श्राप से ग्रसित राजा परीक्षित ने मृत्यु से पूर्व मोक्ष प्राप्ति के लिए शुकदेव से भागवत श्रवण का अनुरोध किया। सात दिनों तक चली इस दिव्य कथा को न केवल राजा परीक्षित, बल्कि 88,000 ऋषि-मुनियों ने भी श्रवण किया। इसी कारण शुकताल को भागवत की जन्मभूमि कहा जाता है।
इस कथा के साक्षी बने अक्षय वट वृक्ष को आज भी अमर माना जाता है। कहा कि अकारण किसी जीव को कष्ट देना अधर्म है। धर्म आचरण से पहचाना जाता है और अहिंसा उसका प्रथम आभूषण है। धर्म केवल पहचान नहीं, साधना और आचरण है। संवाद