पहाड़ों का सीना चीरे बिना मलबे से ही तैयार हो रहा मजबूत बेस
44.50 करोड़ की योजना से संवर रहीं करसोग की 4 मुख्य सड़कें
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पहाड़ों में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण हमेशा एक चुनौती रहा है, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने करसोग में एफडीआर तकनीक के माध्यम से इसका प्रभावी समाधान खोजा है। इस तकनीक से पुरानी सड़कों के मलबे का 100 प्रतिशत पुनर्चक्रण कर ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम ग्राम सड़क योजना के तृतीय चरण के तहत करसोग क्षेत्र में सड़कों को अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनाने के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया गया है। दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए इस बार पारंपरिक तरीकों के बजाय एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक को प्राथमिकता दी गई है। यह वैज्ञानिक तकनीक न केवल सड़कों की आयु बढ़ा रही है, बल्कि संवेदनशील पहाड़ी पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।
आमतौर पर सड़क मरम्मत में केवल ऊपरी परत की ही मरम्मत की जाती है, जिससे निचली परतें कमजोर रह जाती हैं और बारिश के दौरान सड़कें दोबारा क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके विपरीत एफडीआर तकनीक में भारी मशीनों की मदद से पुरानी और क्षतिग्रस्त सड़क की पूरी परत को गहराई तक पुनर्निर्मित किया जाता है। निकाले गए मलबे को वैज्ञानिक प्रक्रिया से रीसाइकल कर मजबूत बेस में परिवर्तित किया जाता है। इस 100 प्रतिशत रीसाइक्लिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नई सड़क निर्माण के लिए पहाड़ों की कटाई कर नए पत्थर, गिट्टी या मिट्टी निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे निर्माण मलबे के निस्तारण की समस्या भी समाप्त हो जाती है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होता है। एफडीआर तकनीक से करसोग मंडल की चार सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है। लगभग 44.50 करोड़ रुपये की लागत से 53 किलोमीटर सड़क मार्ग को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिसमें खील से भगालू सड़क (17 किमी), खील से कुफरी माहूंनाग सड़क (11 किमी), चलोग से बगैला सड़क (10 किमी) और केलोधार से स्यांज सड़क (15 किमी) शामिल हैं।
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एफडीआर तकनीक सड़कों की गुणवत्ता और आयु बढ़ाने के साथ भविष्य में रखरखाव लागत को भी न्यूनतम कर देती है। करसोग में लगभग 44.50 करोड़ रुपये की लागत से 53 किलोमीटर सड़क मार्ग को सुदृढ़ किया जा रहा है। -अजय राज गुप्ता, कार्यकारी अधिशाषी अभियंता, लोक निर्माण विभाग मंडल करसोग