जोगिंद्रनगर अस्पताल में जंग खाए स्ट्रेचर पर हो रहा मरीजों का उपचार। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। मंडी जिला के जोगिंद्रनगर में स्थित 1940 के दशक के अस्पताल की सुविधाएं और संसाधन वर्षों से अपर्याप्त रहे हैं। इससे अस्पताल परिसर के भवन खंडहर होते जा रहे हैं। जंग खाए स्ट्रेचरों के सहारे मरीजों का इलाज और दूषित पानी का रिसाव सबके लिए परेशानी खड़ा कर रहे हैं। रखरखाव और मरम्मत के अभाव में अस्पताल परिसर के कई कमरे गिरने की कगार पर हैं।
अस्पताल के मातृ-शिशु भवन, आईसीटीसी लैब और क्षय रोग मरीजों के लिए आरक्षित भवन की स्थिति बेहद खराब है। करीब 55 पंचायतों की सवा लाख आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभाले 100 बिस्तर वाले अस्पताल में पिछले दस साल से अल्ट्रासाउंड सेवाएं भी बहाल नहीं हो पाई हैं। रक्त भंडारण की सुविधा का अभाव भी घटना-दुर्घटनाओं में घायलों को उपचार दिलाने में कठिनाइयों का कारण बन रहा है।
अस्पताल के पांच आरक्षित रोगी वार्डों में महिला और सर्जिकल वार्ड की दीवारों पर सीलन और शौचालयों से दूषित पानी की दुर्गंध से संक्रमण फैल रहा है। बजट की कमी के कारण अस्पताल के जीर्णोद्धार और रंग-रोगन के कार्य कई वर्षों से रुके हुए हैं। अस्पताल में हर रोज 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं, जबकि 19 चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें आठ विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं।
सीएमओ मंडी डॉ. नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि जोगिंद्रनगर अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए समय-समय पर बजट प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों के लिए बजट आड़े आ रहा है, उसकी रिपोर्ट हासिल करने के बाद उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाएगा ताकि उपमंडलीय अस्पताल में लंबित विकास कार्यों को शीघ्र पूरा किया जा सके।
जोगिंद्रनगर अस्पताल में जंग खाए स्ट्रेचर पर हो रहा मरीजों का उपचार। संवाद
जोगिंद्रनगर अस्पताल में जंग खाए स्ट्रेचर पर हो रहा मरीजों का उपचार। संवाद