कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर स्थित झलोगी टनल को भूस्खलन के खतरे से सुरक्षित करने के लिए प्रवेश द्वार की जगह बदलने की तैयारी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके लिए ऑस्ट्रिया के विशेषज्ञों की मदद लेने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञ अब टनल का विस्तृत डिजाइन तैयार करेंगे। प्रारंभिक डिजाइन में मौजूदा मुहाने को करीब 500 मीटर आगे बनाने का सुझाव दिया गया है। इस विकल्प को अपनाने पर सुरंग की लंबाई लगभग 300 मीटर बढ़ सकती है।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य टनल के प्रवेश द्वार को उस हिस्से से दूर करना है, जहां पहाड़ी अस्थिर होने के कारण चट्टानें और मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है। एनएचएआई जोखिम वाले पहाड़ी हिस्से को छेड़े बिना सुरक्षित स्थान पर नया मुहाना बनाने के विकल्प पर काम कर रहा है। हालांकि, इसकी अंतिम स्थिति और सुरंग की वास्तविक लंबाई विस्तृत डिजाइन तैयार होने के बाद ही तय होगी।
2023 में शुरू हुआ था भूस्खलन
झलोगी टनल के प्रवेश द्वार के आसपास वर्ष 2023 में भूस्खलन शुरू हुआ था। वर्ष 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान स्थिति और गंभीर हो गई। पहाड़ी से चट्टानें और मलबा गिरने के कारण टनल के मुहाने को नुकसान पहुंचा। इसके बाद इस हिस्से को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी विकल्पों पर विचार किया गया।
प्रभावित हिस्से को पहले की स्थिति में बहाल करने के बजाय अब प्रवेश द्वार को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की संभावना पर काम किया जा रहा है। प्रारंभिक आकलन में ऑस्ट्रिया के विशेषज्ञ ने मुहाने को आगे निकालने का सुझाव दिया था। अब इस विकल्प की तकनीकी व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
500 मीटर आगे बनाने का सुझाव
प्रारंभिक डिजाइन के अनुसार, टनल का नया मुहाना मौजूदा स्थान से करीब 500 मीटर आगे बनाया जा सकता है। इस बदलाव के कारण सुरंग की लंबाई लगभग 300 मीटर बढ़ने का अनुमान है। नई योजना में पहाड़ी की भूगर्भीय स्थिति, चट्टानों की स्थिरता और मलबा गिरने के संभावित खतरे का आकलन अहम होगा। विस्तृत डिजाइन में यह भी देखा जाएगा कि नया प्रवेश द्वार किस स्थान पर बनाना तकनीकी रूप से उपयुक्त रहेगा। यह बदलाव केवल क्षतिग्रस्त मुहाने की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि टनल के प्रवेश क्षेत्र को भविष्य में संभावित भूस्खलन से बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
अस्थिर पहाड़ी को छेड़ने से बचने की योजना
एनएचएआई की योजना जोखिम वाले पहाड़ी हिस्से में बड़े बदलाव करने के बजाय टनल का मुहाना सुरक्षित स्थान पर बनाने की है। इससे पहाड़ी के अस्थिर हिस्से के साथ सीधे छेड़छाड़ करने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, निर्माण की अंतिम तकनीक और सुरक्षा उपाय विस्तृत डिजाइन में तय होंगे। ऑस्ट्रिया के विशेषज्ञ भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरंग के नए एलाइनमेंट का अध्ययन करेंगे। इसके बाद परियोजना की लागत, निर्माण की तकनीकी व्यवस्था और अन्य जरूरी पहलुओं को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
विस्तृत अध्ययन के बाद मुख्यालय भेजी जाएगी डीपीआर
एनएचएआई के मंडी स्थित परियोजना कार्यान्वयन इकाई के उपप्रबंधक दिग्व्रत के अनुसार, झलोगी टनल को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विस्तृत अध्ययन पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) स्वीकृति के लिए एनएचएआई मुख्यालय भेजी जाएगी। फिलहाल 500 मीटर आगे मुहाना बनाने और सुरंग की लंबाई करीब 300 मीटर बढ़ाने का विकल्प प्रारंभिक डिजाइन का हिस्सा है। अंतिम फैसला विस्तृत तकनीकी अध्ययन और स्वीकृति प्रक्रिया के बाद ही होगा।