थुनाग (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के सराज विधानसभा क्षेत्र में शैटाधार, सपैहणीधार और तुंगासीगढ़ जैसी अनछुई ईको टूरिज्म साइटों को विकसित करने की वन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना को करारा झटका लगा है। तीन बार टेंडर की तारीख बढ़ाने के बावजूद एक भी बोलीदाता सामने नहीं आया। पहले 5 मई तक आवेदन मांगे गए थे। इन्हें 25 मई तक बढ़ाया गया, लेकिन कोई निवेशक आगे नहीं आया।
वन विभाग की कड़ी शर्तों, साइटों की नवीनता और पर्यटकों को आकर्षित करने में चुनौतियों ने निवेशकों का उत्साह ठंडा कर दिया। पर्यटन कारोबारी नरेंद्र बाबा ने बताया कि अधिकांश साइटों तक पहुंचने वाली सड़कें खस्ताहाल हैं। इससे पर्यटकों का आना मुश्किल है। योजना के तहत रेस्ट हाउस, टेंट, लकड़ी और प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर के जरिए ईको-फ्रेंडली पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की तैयारी थी।
पूर्व जिला परिषद सदस्य संत राम के अनुसार इससे स्थानीय युवाओं को नेचर वॉक, ट्रैकिंग, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और जंगल सफारी जैसे कार्यों में रोजगार मिलने की उम्मीद थी। निवेशकों की उदासीनता ने इस सपने को धूमिल किया है। डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि ईको टूरिज्म पॉलिसी का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण, स्थायी विकास और स्थानीय समुदायों को आर्थिक अवसर देना था। टेंडर में रुचि न दिखने से योजना को झटका लगा है। अब विभाग नई रणनीति पर विचार कर रहा है।
17 साइटों का था प्लान
हिमाचल प्रदेश ईको टूरिज्म सोसायटी के तहत सराज में 17 साइटों शैटाधार, सपैहणीधार, तुंगासीगढ़, भाटकीधार, देओकांढ़ा, रैनगलू, खौली, खोड़ाथाच, थाची, पंजाई, नौणा, भुलाह, धरोटधार, बिजड़ी, स्टिंबरजर, देवीदहड़ और सरोआ को ईको टूरिज्म के लिए चिह्नित किया गया था। इन साइटों को ईको टूरिज्म पॉलिसी 2024 के तहत विकसित करने के लिए केंद्रीय वन संरक्षण, पर्यावरण एवं जलवायु संरक्षण मंत्रालय से मंजूरी ली गई थी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट में इसकी घोषणा भी की थी।
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