मंडी। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के दुर्घटनाग्रस्त वाहन का 4,05,609 रुपये मुआवजा ब्याज सहित अदा करने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा बीमा कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में दस हजार रुपये हर्जाना और पांच हजार रुपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पुरेंद्र वैद्या और सदस्यों मांचली और यशवंत सिंह ने जोगिंद्रनगर तहसील के जनवां (गुम्मा) गांव निवासी रीता देवी पत्नी देवेंद्र कुमार की शिकायत को उचित मानते हुए न्यू इंडिया इंश्योरोंस कंपनी को उक्त हर्जाना राशि 6 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता आरके चावला के माध्यम से आयोग में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता रीता देवी ने अशोका लेयलैंड कंपनी का एक टिप्पर खरीदा था। जिसका बीमा उन्होंने उक्त बीमा कंपनी के पास करवाया था। बीमा अवधी में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जिस पर उपभोक्ता ने बीमा कंपनी को मुआवजा अदा करने को कहा था। लेकिन कंपनी ने वाहन का परमिट न होने के कारण मुआवजा खारिज कर दिया था। हालांकि इस बारे में उपभोक्ता का कहना था कि कोविड महामारी के कारण उन्हें वाहन की आरसी की हार्ड कापी नहीं दी गई थी। जिसके कारण उन्हें परमिट जारी नहीं हो पाया था। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि हालांकि दुर्घटना वाले दिन शिकायतकर्ता के वाहन के लिए आवश्यक परमिट नहीं था। लेकिन राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने जसदेव सिंह बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी मामले में यह व्यवस्था दी है कि जिन मामलों में बीमा कंपनी वैध परमिट न होने के कारण क्लेम को खारिज करती है उनमें नॉन-स्टैंडर्ड आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए। ऐसे में जिला आयोग ने उक्त व्यवस्था के तहत बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा खारिज करने को सेवाओं में कमी करार देते हुए नॉन-स्टैंडर्ड आधार पर मुआवजे की 75 प्रतिशत राशि के तहत उक्त मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने तथा हर्जाना व शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है।