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नई पीढ़ी में डालें पहाड़ी के संस्कार : केआर पंछी

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भाषा एवं संस्कृति विभाग ने किया जिला स्तरीय पहाड़ी कवि गोष्ठी का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पहाड़ी को अगर भाषा का स्वरूप प्रदान करना है तो आंचलिक बोलियों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग मंडी की ओर से जिला स्तरीय पहाड़ी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पहाड़ी के मशहूर गीतकार एवं कवि केआर पंछी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। पहाड़ी कवि एवं टांकरी के विद्वान जगदीश कपूर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि केआर पंछी ने कहा कि नई पीढ़ी में पहाड़ी भाषा के संस्कार डालने से पहाड़ी का भविष्य उज्ज्वल होगा। बताया कि पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों को पहाड़ी बोली के आधार पर ही हिमाचल में शामिल किया गया था। कहा कि पहाड़ी भाषा को अगर वजूद में आना है तो आंचलिक बोलियों के बीच तालमेल बिठाना आवश्यकता है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगदीश कपूर ने कहा कि पहाड़ी को घर से ही महत्व दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने बेहतरीन रचनाओं का पाठ किया। रूपेश्वरी शर्मा, हरिप्रिया शर्मा, निर्मला चंदेल, सुरेंद्र मिश्रा, यश्स्विनी जमवाल, बबली कुमारी, धर्मचंद वर्मा, मुरारी शर्मा आदि ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
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इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने अपनी सुरीली आवाज में लोकगीत भ्यागड़ा-दुधा छोलने री बेला ओ गुजरिये उठ चक बे मधाणियां लाया अड़िये और कृष्णा ठाकुर ने लोकगीत भौरू सुनाया। मुख्य अतिथि केआर पंछी ने भी अपना लिखा हुआ गीत सुनाया। संवाद
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