मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने कुल्लू जिले के मल्टीबाग मुहाल में फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मध्यस्थ कम मंडी मंडलायुक्त की ओर से पारित अवार्ड को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।
मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के नेरचौक-मनाली फोरलेन निर्माण से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने वर्ष 2016 में भूमि का मुआवजा 1534 रुपये प्रति वर्गमीटर तय किया था। भूमि मालिकों ने इस मुआवजे को कम बताते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3जी(5) के तहत मध्यस्थ के समक्ष दावा दायर किया था।
मध्यस्थ-कम-मंडी मंडलायुक्त ने 14 मार्च 2024 को पारित अवार्ड में मुआवजा बढ़ाकर 4070 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया था। साथ ही भूमि मालिकों को वैधानिक लाभ और ब्याज देने के आदेश भी दिए थे। इस अवार्ड को एनएचएआई ने जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत में चुनौती दी थी। एनएचएआई का तर्क था कि मध्यस्थ ने दूसरे क्षेत्र के अवार्ड को आधार बनाकर मुआवजा बढ़ाया, जो कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने कहा कि मध्यस्थ ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूर्व अवार्ड के आधार पर उचित तरीके से बाजार मूल्य निर्धारित किया है। अदालत ने माना कि एनएचएआई की ओर से बाजार दर साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मध्यस्थ का अवार्ड तथ्यों और कानून के अनुरूप है तथा इसमें किसी प्रकार की स्पष्ट अवैधता नहीं पाई गई। ऐसे में न्यायालय को हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने एनएचएआई की याचिका खारिज करते हुए पक्षकारों को अपने-अपने खर्च वहन करने के आदेश दिए।