मंडी। जिला रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में चलाई गई डिजिटल एक्स-रे मशीन पिछले चार माह से खराब पड़ी है। इससे अस्पताल की सरकारी एक्स-रे मशीन के साथ ही रेडियोग्राफर पर अत्यधिक बोझ बढ़ गया है। अस्पताल में रोजाना करीब 250 एक्स-रे किए जाते हैं, लेकिन मशीन के खराब होने के कारण मरीजों को महंगे निजी लैब और अस्पतालों में एक्स-रे करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अस्पताल में सुबह 9ः00 बजे से देर रात तक मरीज एक्स-रे के लिए लंबी कतारों में लगे रहते हैं। लगातार शिफ्टों में ड्यूटी दे रहे रेडियोग्राफर को मशीनों से निकलने वाले रेडिएशन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को लेकर कई बार सामाजिक संगठनों और लोगों ने रेडक्रॉस सोसायटी, अस्पताल और जिला प्रशासन से बंद पड़ी मशीन को ठीक करवाने और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
वरिष्ठ नागरिक सभा के प्रधान ओपी कपूर, प्रेस सचिव नीरज हांडा, अशोक राणा और महिला मंडल प्रधान धर्मी देवी का कहना है कि अस्पताल में दो एक्स-रे मशीनें हैं, लेकिन एक समय में एक ही मशीन का उपयोग हो रहा है। इससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। एक्स-रे कक्ष में 24 घंटे तीन कर्मचारी, तीन शिफ्टों में ड्यूटी देते हैं, लेकिन एक एक्स-रे के लिए 5 से 7 मिनट लगते हैं, जबकि आपात स्थितियों में यह समय 10 से 20 मिनट भी हो सकता है। इस लंबे इंतजार से मरीजों को परेशानी और रेडियोग्राफर को रेडिएशन से नुकसान हो रहा है।
जोनल अस्पताल के एमएस डॉ. धर्म सिंह वर्मा ने कहा कि अस्पताल में अधिकांश स्टाफ अनुबंध और आउटसोर्स पर काम कर रहा है। कर्मचारियों की तैनाती उच्चाधिकारियों के हाथ में है और अनुमति मिलने पर ही स्टाफ बढ़ाया जा सकता है। जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव ओपी भाटिया ने आश्वासन दिया है कि बंद पड़ी मशीन को इसी सप्ताह चालू कर दिया जाएगा।