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होली उत्सव : आस्था के रंग में रंगी छोटी काशी

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मंडी। शहर में होली उत्सव के दौरान युवा पीढ़ी ने आधुनिकता के रंग में रंगकर खूब जश्न मनाया। वहीं, शहरवासियों ने प्राचीन परंपरा का भी बखूबी निर्वहन किया। युवा ऐतिहासिक सेरी मंच के सामने डीजे की धुनपर जमकर थिरके। दूसरी ओर शहरवासियों ने राजमहल में राज देवता माधो राय को गुलाल लगाकर होली खेली। होली खेलने के लिए राज देवता अपने मंदिर के बाहर बरामदे में विराजमान रहे। बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों ने सेरी मंच से इतर राज देवता माधो राय के साथ रंगोत्सव मनाया।
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राज देवता मंदिर के बाहर इस्कान संस्था के अनुयायियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर भारतीय संस्कृति के रंग में रंगकर नृत्य किया। संस्था का उद्देश्य भगवान कृष्ण की भक्ति (भक्ति योग) गीता के ज्ञान और हरे कृष्ण मंत्र का प्रचार करना है। इस दौरान समूचा परिवेश हरे कृष्णा से गुंजायमान रहा। दरअसल, राज देवता माधो राय को मंडी रियासत का राजा कहा जाता है, इसलिए होली का त्योहार इन्हें रंग लगाए बिना अधूरा माना जाता है। माधो राय को गुलाल लगाने के बाद होली उत्सव मनाया जाता है।
रियासतकाल से चली आ रही परंपरा
कहा जाता है कि रियासतकाल में राजा घोड़े पर सवार होकर प्रजा के बीच होली खेलने जाते थे। उस समय स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाती थी। मंदिर के प्रांगण में पीतल के बड़े बर्तनों में रंग घोला जाता था। राजा अपने दरबारियों के साथ यहां होली खेलते थे। रियासतकाल खत्म हो गया है, लेकिन शहर में राजा और प्रजा का मेल आज भी जारी है।
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