मंडी। राजधानी शिमला में स्वाइन फ्लू का मामला आने के बाद मंडी में भी अलर्ट जारी कर दिया है। स्वाइन फ्लू में दी जाने वाली दवाओं की खरीद के साथ सिविल अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए हैं। यहां टेस्ट की सुविधा के अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक भी मौजूद हैं।
स्वाइन फ्लू को लेकर सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। दवा भी पर्याप्त मात्रा में रखवा दी गई है। मेडिकल कॉलेज नेरचौक एवं जोनल अस्पताल मंडी की ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। बीमारी से बचाव को लेकर हिदायत दी जा रही है। बच्चों के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड भी तैयार कर दिया है।
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क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू इनफ्लुएंजा (फ्लू वायरस) के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इस वायरस को ही एच-1 एन-1 कहा जाता है। इसके संक्रमण ने वर्ष 2009-10 में महामारी का रूप धारण कर लिया था। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 10 अगस्त, 2010 में इस महामारी के खत्म होने का भी एलान कर दिया था। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था। तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था, क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से यह मिलता-जुलता था।
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ऐसे करें बचाव
स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। हालांकि अब इसका उपचार भी मौजूद है। आराम, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना, शुरुआत में पैरासिटामोल जैसी दवा बुखार कम करने के लिए दी जाती है। बीमारी के बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना, कफ, कोल्ड और लगातार खांसी, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न, सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान, दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना, गले में खराश का लगातार बढ़ना आदि
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बरती जा रही एहतियात : नरेश चंद
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के एमएस डॉ. नरेश चंद का कहना है कि स्वाइन फ्लू के साथ-साथ कोरोना वायरस को लेकर एहतियात बरती जा रही है। क्षेत्रीय अस्पताल में एक विशेष आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया गया है। संक्रमित रोगी के उपचार के लिए एमडी विशेषज्ञ भी मौजूद रहेगा।
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