मंडी। शहर के विश्वकर्मा मंदिर के समीप दरकी पहाड़ी को अब हाइड्रो सीडिंग तकनीक से हरा-भरा और अधिक सुरक्षित बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इससे पहाड़ी की ढीली मिट्टी को स्थिर कर भविष्य में भूस्खलन की आशंका को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्य पर लगभग 2.50 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
यह कार्य उस क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा के दौरान भारी भूस्खलन हुआ था। उस समय एक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया था और आसपास के कई घरों पर खतरा मंडराने लगा था। इसके बाद 2024 के मानसून में क्षेत्र को अस्थायी रूप से तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखने की कोशिश की गई थी।
बाद में लगभग 1.50 करोड़ रुपये की लागत से रॉक बोल्टिंग तकनीक के माध्यम से पहाड़ी को स्थायी रूप से स्थिर करने का कार्य किया गया। अब उसी क्रम में हाइड्रो सीडिंग की जा रही है, जो ढलान वाली और कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और कटाव रोकने की आधुनिक तकनीक है।
इस प्रक्रिया में पानी, घास के बीज, खाद, लकड़ी के रेशे और प्राकृतिक गोंद का मिश्रण तैयार कर उसे प्रेशर के जरिये पहाड़ी की सतह पर छिड़का जाता है। इससे मिट्टी की पकड़ मजबूत होती है और कुछ ही दिनों में हरियाली उगनी शुरू हो जाती है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता डीके वर्मा ने बताया कि पहाड़ी का सुरक्षा कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है और अब हाइड्रो सीडिंग के माध्यम से इसे और अधिक स्थिर एवं हरित बनाने का काम जारी है। संवाद