भवन नियमितीकरण संघर्ष समिति मंडी ने शहरों में 30 फीसदी ओपन स्पेस हटाने की मांग की है। जबकि प्रदेश सरकार के अध्यादेश में छोटे मकानों को नियमित करने की दरों में कमी लाने की मांग उठाई है। समिति ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समक्ष मांगों को रखने का निर्णय लिया है।
भवन नियमितीकरण संघर्ष समिति की बैठक बुधवार को सीनियर सिटीजन भवन में आयोजित हुई। समिति के संयोजक उत्तम चंद सैनी, अमर चंद वर्मा, चंद्रमणी वर्मा, हितेन्द्र शर्मा, हरमीत सिंह बिट्टू, प्रदीप परमार, समीर कश्यप, मुरारी लाल शर्मा, रमेश वालिया व अन्य पदाधिकारियों ने कहा बैठक में टीसीपी के संशोधित अध्यादेश के बारे में विचार विमर्श किया गया। समिति का कहना है कि भवनों के नियमितीकरण की दरों को कम किया जाए, 30 प्रतिशत ओपन स्पेस की शर्त को भीड़ भरे शहरी क्षेत्रों में लागू न किया जाए। आवेदन करने की निर्धारित समय सीमा न रखी जाए।
समिति के सदस्यों ने कहा कि सरकार की ओर से जारी नियमितीकरण की पॉलिसी अभी भी आम जनता की पहुंच से दूर है। समिति का मानना है कि छोटे घरों के मालिक व छोटे व्यवसायिक परिसरों वाले लोग अभी भी इस एकमुश्त नियमितीकरण पॉलिसी का फायदा नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि कि मौजूदा पॉलिसी के मुताबिक अगर किसी का मकान 160 वर्ग मीटर (चार बिस्वा) में बना है तो इसके ग्राउंड फ्लोर के सेटबैक की 70 प्रतिशत डेविएशन के लिए करीब एक लाख नौ हजार रुपये अदा करनी होगी। इसके अलावा 54 हजार रुपये प्रति मंजिल के हिसाब से अन्य फ्लोंरो की फीस निर्धारित की गई है।
इस तरह से नगर परिषद क्षेत्र में इस रकबे के लिए कुल फीस करीब 2.18 लाख रुपये तय की गई। उसी तरह नप क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर तक की नियमितिकरण फीस 1.5 लाख निर्धारित की है। जबकि तीन मंजिलों तक यह 4.5 लाख रुपये बनती है। इस अवसर पर टीसीपी के तहत लाए गए मंडी शहर के साथ लगते गांवों तल्याहड, नेला, सिल्हा कीपड, सन्यारढ, पंजेहटी और बाड़ीगुमाणु के लोगों ने भी बैठक में भाग लेकर टीसीपी नियमों के ग्रामीण क्षेत्र में लागू हो रहे नियमों के बारे में चर्चा की।