सुंदरनगर फोरलेन प्रभावित परिवार जन आंदोलन संगठन की ओर से किए जा रहे धरना प्रदर्शन के 16वें दिन एक हंगामी बैठक आयोजित की गयी। इसमें प्रभावितों ने आरोप लगाया कि नये भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों की गलत व्याख्या कर मुआवजों के पुननिर्धारण करने की मांग को निरस्त करने के प्रयास किए जा रहे है।
इसके लिए कीरतपुर-मनाली वाया नेरचौक के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई, भू-अर्जन अधिकारी, विशेष भू-अधिग्रहण इकाई बिलासपुर, प्राइवेट ठेकेदार कंपनी और प्रशासन सीधे-सीधे जिम्मेवार है। बैठक में सहमति बनी कि अगर प्रशासन ने मध्यस्थता कर नए एक्ट के अनुसार मुआवजा निर्धारण की मांग को हल नहीं करवाया तो भूख हड़ताल और सड़क रोको जैसे कई उग्र प्रदर्शनों का सिलसिला जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
प्रभावितों यादविंद्र पुरी, घनश्याम, यशपाल, राजा ठाकुर, राकेश सेन आदि ने कहा कि मांगों के बारे में किसी को कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। सैकड़ों प्रभावितों के प्रतिनिधि अपने अधिकारों की लड़ाई सड़कों पर बैठकर लड़ने के लिए इसलिए विवश हुए क्योंकि उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। फोरलेन प्रभावितों ने मांग दोहराते हुए कहा कि यहां एक फोरलेन के निर्माण के लिए भूमि अधिगृहित की जा रही है, लेकिन मुआवजे देने के सवाल पर संलिप्त विभागों द्वारा दो तरह के कानून लागू किए जा रहे हैं।
इस बारे में मंडी संसदीय क्षेत्र के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कई बार सार्वजनिक तौर पर घोषणाओं में कहा है कि केंद्र की ओर से सभी फोरलेन प्रभावितों को एक समान बचे हुए मुआवजे देने के लिए धनराशि भी जमा करवाई जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष नया भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 पूरी फोरलेन के लिए लागू करवाने के लिए चलाया जा रहा है।