गोहर (मंडी)। नाचन और सिराज में भोलेनाथ का शिवरात्रि पर्व अलग संस्कृति और रीति-रिवाज के साथ मनाया गया है। शिवरात्रि पर लोग ने अपने-अपने घरों में भल्ले, बबरू और रोट बनाए। शाम को शिव पूजा के लिए भगवान की मनपसंद जड़ी बूटी न्यार के साथ कुपु (संतरा प्रजाति का फल) की माला बनाकर भगवान शिव की तस्वीर पर चढ़ाई गई। नाचन और सिराज घाटी में शिव की पूजा भी आग में न्यार डालकर दिए जाने वाले धूप से की गई।
क्षेत्र में लोग शिवरात्रि पर अपने अपने घरों में शिवजी भगवान की दीवार पर तस्वीर भी बनाते हैं। इस पर न्यार और कुपु कि माला (चंदो) लगाकर भल्ले, बबरु और रोट भगवान शिव को अर्पित किए गए। न्यार का धूप देकर परिवार के सभी सदस्य ने शिव पूजन कर खुशहाली की कामना की गई। घाटी में शिवरात्रि पर बनाए गए मीठे रोट घाटी के लोग करीब एक माह तक खाते हैं। दूध के साथ इन मीठे रोट का अलग ही स्वाद होता है।
शिवरात्रि से पूर्व घाटी में जिन लोगों ने नया घर बनाया है, उस घर में शिवजी भगवान को खारका दिया जाता है। इसमें भगवान शिव के गीत रातभर गुनगुनाए जाते हैं और पांच लोग रात भर उन गानों पर नाचते हैं। खारका के दौरान भगवान शिव को बकरे की बलि भी दी जाती है। शिवरात्रि पर्व पर लोगों ने भगवान शिव के मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बिल पत्र चढ़ाने सहित जलाभिषेक किया।