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13 में से आठ पंचायतों का प्रस्तावित पूरा एरिया निगम में शामिल, पांच पंचायतों को मिली राहत

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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
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मंडी। प्रदेश सरकार ने मंडी नगर निगम में चार पंचायतों को पूर्ण रूप से जबकि सात को आंशिक रूप से शामिल किया है।
नगर निगम मंडी में चार पंचायतें नेला, बैहना, संगराड़ और दौंधी को पूर्ण रूप से जबकि सात पंचायतों चलाह, भढयार, भरौण, तुंग, बिजन, बारी और तलेहड़ को आंशिक रूप से शामिल किया गया है। नगर निगम का दर्जा प्राप्त करने के बाद नगर परिषद मंडी की जनसंख्या 26,431 से बढ़कर 41,384 हो जाएगी।
जन विरोध को देखते हुए सात पंचायतों के कुछ क्षेत्रों को निगम क्षेत्र से बाहर रखा गया है। अभी इसका प्रारूप सरकार के पास है। इसमें कुछ फेरबदल संभव है। नगर निगम को लेकर सरकार को भेजे मसौदे में नेला, बैहना, संगराड़ और दौंधी पंचायत के अलावा नगर परिषद के प्लानिंग एरिया शामिल किया गया है। इसके अलावा चलाह, भढयार, भरौण, तुंग, बिजन, बारी और तलेहड़ पंचायत के कुछ भाग को नगर निगम से बाहर किए हैं। सरकार को भेजे मसौदे पर अब लोगों की नजरें टिकी हैं।
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अब शहर में वार्ड बंदी भी नए सिरे से होगी। नगर परिषद के 13 वार्डों में से 6, 7 का एक वार्ड और 8, 9 का भी एक वार्ड बनाने पर मुहर लगी सकती है। दस नंबर वार्ड टारना में डाला जा सकता है। इसी तरह चौदह नंबर वार्ड का शहरी क्षेत्र से गठन होगा। शहर के आस-पास नए शामिल क्षेत्र में 15 से 19 वार्ड नगर निगम के बनाएं जाएंगे। नगर निगम बनने से तीन विस क्षेत्र मंडी सदर, बल्ह और द्रंग प्रभावित हुए हैं।
एक वार्ड में होगी 2500 तक की संख्या : सुमन
नगर परिषद अध्यक्ष सुमन ठाकुर ने बताया कि मंडी नगर निगम में 15 से 19 तक वार्ड बनाने की योजना है। 2500 संख्या के आधार पर एक वार्ड गठित होगा। नगर निगम बनाने को लेकर मंडी शहर में खुशी की लहर है। ऐसे ग्रामीण क्षेत्र बाहर किए गए हैं जहां शहर के विकास की संभावना कम है।
तो मेयर सीट महिला के लिए होगी आरक्षित
नगर निगम में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा मेयर की सीट महिला आरक्षित होने की भी पार्षदों ने संभावना जताई है। इसे लेकर अभी लॉबिंग शुरू हो गई है। पार्षद की कुर्सी तक कौन पहुंचेगा, इसे लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। वर्तमान अध्यक्ष के अलावा कुछ नए चेहरों पर भी पार्टी विचार कर सकती है। इस समय नगर परिषद के 13 वार्डों में से नौ पर भाजपा और चार पर कांग्रेस काबिज है।
तीन साल का टैक्स माफ नाकाफी, जारी रहेगा विरोध
नगर निगम में ग्रामीण क्षेत्र शामिल किए जाने का ग्रामीण संघर्ष समिति ने विरोध किया है। समिति के प्रधान रवि चंदेल ने कहा कि पंचायतों को निगम में शामिल न किया जाए। तीन साल का जो टैक्स माफ किया है वह नाकाफी है। नगर परिषद परिषद के भेजे मसौदे में पंचायतों के कौन से क्षेत्र काटे और कौन से शामिल किए की नोटिफिकेशन सरकार जारी रके। जब सरकार की पूरी नोटिफकेशन सामने आएगी, तभी आगे की रणनीति तैयार होगी।
क्या कहते हैं विधायक
तीन साल के बाद तो लिया जाएगा टैक्स : अनिल शर्मा
नगर निगम को लेकर मेरा विरोध नहीं है। लेकिन विरोध के बावजूद नगर निगम में ग्रामीण एरिया शामिल किए गए हैं। आखिर तीन साल के बाद तो टैक्स लिए जाएंगे। मंडी को नगर निगम बनाया है तो इसे स्मार्ट सिटी भी बनाएं। नगर निगम को प्रदेश सरकार से पैसा मिलेगा। केंद्र से कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
अनिल शर्मा, विधायक, मंडी सदर
नगर निगम बनना सरकार का फैसला: जवाहर
मंडी शहर को नगर निगम बनाना सरकार फैसला है। जनसंख्या होगी तो ही नगर निगम बनेगा। हालांकि पंचायत के लोग विरोध करते हैं लेकिन नगर निगम बनने से शहर का अथाह विकास होगा।
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जवाहर ठाकुर, विधायक, द्रंग
लोगों के साथ खड़ा हूं : इंद्र सिंह
जनता की आवाज के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा। राहत की बात है कि बल्ह का काफी क्षेत्र नगर निगम में शामिल नहीं किया गया है। यहां बिलासपुर लेह रेललाइन गुजरनी है। जहां से यह रेललाइन गुजरनी है, उस क्षेत्र को नगर निगम में शामिल किया गया है। नगर निगम में फायदे भी बहुत हैं।
इंद्र सिंह गांधी, विधायक, बल्ह
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