मंडी। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद स्वदेश लौटे स्नातकों को इंटर्नशिप के दौरान भारतीय मेडिकल स्नातकों के समान मानदेय दिया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (एफएमजी) का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को नेरचौक मेडिकल कॉलेज के दौरे पर आए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिला।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्पतालों में इन दिनों सैकड़ों की संख्या में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स अपनी कंपलसरी रोटेटरी इंटर्नशिप कर रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि इंटर्नशिप कर रहे भारतीय मेडिकल स्नातकों के समान चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें मरीजों की देखभाल, वार्ड सेवाएं, आपातकालीन सेवाएं और अस्पताल की गतिविधियां शामिल हैं। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स को भारतीय मेडिकल स्नातकों के समान मानदेय नहीं दिया जा रहा है। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स भी इसी देश व प्रदेश के स्थायी निवासी हैं। ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का सौतेला व्यवहार अन्यायपूर्ण है।
ज्ञापन के अनुसार फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएटस को मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार द्वारा एक सर्कुलर जारी किया गया है जिसमे यह बताया गया है कि फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएटस को भी भारतीय स्नातकों जितना स्टाइपंड देना है। फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स ने उम्मीद जताई है कि हिमाचल प्रदेश सरकार उनकी समस्या पर सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी।