सराज विस की ग्राम पंचयात सोमगाड के जुही मे राख के ढेर में तबदील हुआ बड़ा देव बिष्णु मतलोड़ा का ऐति?
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मंडी। मंडी-कुल्लू जिले में अब तक अनेक देवी-देवताओं के ऐतिहासिक मंदिर आग की भेंट चढ़ चुके है। इनमें अरबों रुपये का नुकसान हुआ है। मंदिरों में आग लगने से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुुंच रही है। ऐतिहासिक मंदिरों के देवताओं के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और प्रेम भाव होता है। श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिरों में आग लगना सहीं नहीं है। दोनों जिले के बड़े मंदिरों में दूरदराज से सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं और अपनी दुख पीड़ा को देवता के समक्ष रखते हैं।
गौरतलब है कि 2012 में कोटला में बड़ा देव छमाउं का प्राचीन मंदिर आग की भेंट चढ़ गया था। इसमें देवता के सोने और अष्टधातु की मोहरें आग की भेंट चढ़ गई थीं। इस घटना में करोड़ों का नुकसान हुआ था। इतना ही नहीं इस अग्निकांड में पूूरा गांव आग की चपेट में आ गया था। करीब 70 घर राख में तबदील हुए थे और सैकड़ों परिवार का आशियाना उजड़ गया था। इसके बाद 2017 में सैंज घाटी शांघड़ के आराध्य देव शंगचूल महादेव का प्राचीन मंदिर और देवता का रथ भी आग की चपेट में आ गया था। इसमें भी करोड़ों का नुकसान हुआ था। इसके बाद 2018 में बालीचौकी के खुहण में देवता का मंदिर और सोने की मोहरें में भी आग की भेंट चढ़ गई थीं। इस घटना में भी करीब 70 लाख का नुकसान हुआ था। इसके बाद शनिवार देर रात हुए सराज की ग्राम पंचायत सोमगाड़ के जुही में बड़ा देव बिष्णु मतलोड़ा का ऐतिहासिक मंदिर आग की भेंट चढ़ गया। इस घटना में करीब 30 लाख का नुकसान हुआ है। यह मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के साथ जुड़ा है। मंडी-कुल्लू जिले के भक्त यहां पहुंचते हैं। दोनों जिले में अब तक अनेक मंदिर आग की चपेट में आए हैं।