जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडलीय अस्पताल के समीप कचरे के बड़े ढेर मिलने से शहरी क्षेत्र में स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। कचरे में दवाओं के खाली डिब्बे और इस्तेमाल की गई कॉटन ने हर किसी को सकते में डाल दिया है। लंबे समय से खुले में पड़े कचरे से उठ रही दुर्गंध ने वातावरण को दूषित कर दिया है, जिससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर परिषद से तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई है।
बुधवार को अस्पताल के समीप लगे कचरे के ढेरों में ऐसी सामग्री भी मिली जिसे खुले में फेंकना नियमों के विरुद्ध है। इस्तेमाल किए गए सेनेटरी पैड और डायपर भी विभिन्न स्थानों पर खुले में पाए गए, जिससे स्वच्छता अभियान की छवि पर असर पड़ता दिखा। शहरी क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन से ऐसे लोगों पर सख्ती करने का आग्रह किया है, जो पर्यावरण को दूषित करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
बता दें कि नगर परिषद क्षेत्र में स्वच्छता अभियान को सुदृढ़ करने के लिए एक तरफ डोर-टू डोर गारबेज योजना पर लाखों रुपये खर्च कर गीले और सूखे कचरे के निस्तारण की व्यवस्था लागू की जा रही है। वहीं, मेडिकल बायोवेस्ट के उचित प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके बावजूद खुले में कचरा फैलाने की घटनाएं चिंताजनक हो गई हैं।
मामला ध्यान में लाया गया है। आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद को अवगत करवाया जा रहा है।
-डाॅ. विकास नाथ, एसएमओ, नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर
आवश्यक कार्रवाई अमल में लाकर जिम्मेदार लोगों को सबक सिखाया जाएगा।
-चमन लाल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जोगिंद्रनगर।