मंडी। एमसीएच (मातृ एवं शिशु अस्पताल) मंडी की बाल रोग ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे कुछ बच्चों में काली खांसी की तरह लक्षण देखने को मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि प्रयोगशाला जांच में अभी इस रोग से कोई भी मरीज पीड़ित नहीं पाया गया। शुष्क सर्दी के चलते अस्पताल में एक दो मामले उपचार के लिए आ रहे हैं।
चिकित्सक के अनुसार शुष्क सर्दी का मौसम होने पर लंबे समय बाद विशेष कर बच्चों में इस तरह के रोग के लक्षण देखने को मिल रहे हैं लेकिन इसे काली खांसी नहीं कहा जा सकता। फिर भी एहतियात के तौर पर रोगियों को उपचार दिया जा रहा है। इस रोग में तेज खांसी के साथ दौरा पड़ना, बच्चों की छाती में घरघराहट की आवाज आना, समय पर उपचार न मिलने पर बच्चों के मस्तिष्क का काम बंद करना और निमोनिया से मौत भी हो जाती है।
अस्पताल में अभी इस रोग से कोई भी मरीज पीड़ित नहीं पाया गया है, मात्र रोग जैसे लक्षण देखने को मिले हैं। ऐसे में चिकित्सक परिजनों को बच्चों की विशेष देखभाल के साथ आवश्यक सावधानी बरतते हुए कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि सर्दी के मौसम में यदि बच्चे बीमार पड़ते हैं तो उन्हें अस्पताल में जांच के लिए जरूर दिखाएं।
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शुष्क सर्दी के मौसम में विशेष कर बच्चों में खांसी-जुकाम और वायरल फीवर के लक्षण ज्यादा रहते हैं। इसे काली खांसी से नहीं जोड़ा जा सकता है। अभी तक जांच में इस तरह का कोई मामला नहीं पाया गया है। परिजनों को रोगी की विशेष देखभाल के निर्देश दिए जा रहे हैं। चिकित्सक नियमित तौर पर रोगियों को बेहतर उपचार देने में तत्पर हैं।
-डॉ. दिनेश ठाकुर, एमएस क्षेत्रीय अस्पताल मंडी
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