मंडी। अतिरिक्त प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट सुंदरनगर ने आयुर्वेदिक चिकित्सक को अपनी पत्नी को 5500 रुपये प्रति माह भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दिया है। यह आदेश भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के तहत पारित किया गया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार पत्नी ने 24 अप्रैल 2023 को धारा 125 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर की थी जिसमें उसने अपने पति से 30 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण भत्ते की मांग की थी। दोनों का विवाह 6 दिसंबर 2014 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दंपती की कोई संतान नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विवाह के एक माह बाद से ही पति और उसके परिवार वालों का व्यवहार प्रताड़नापूर्ण हो गया था। उन्होंने धन की मांग की और बाद में उसे घर से निकाल दिया। पत्नी ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पिता की सहायता से पति के घर के निर्माण में तीन लाख रुपये खर्च किए लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मान नहीं मिला। वह पिछले छह वर्षों से पति से अलग रह रही है। 2018 के बाद से पति ने कोई आर्थिक सहायता नहीं दी।
वहीं, पति ने अदालत में कहा कि उसकी अपनी मर्जी से मैट्रिमोनियल घर छोड़कर चली गईं, क्योंकि वह उनकी मां के साथ नहीं रहना चाहती थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को असत्य बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि वह एक छोटे स्तर के आयुर्वेदिक चिकित्सक है और उनकी मासिक आय मात्र नौ से 12 हजार रुपये के बीच है।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों पर विचार करने के बाद पाया कि पत्नी के पास वर्तमान में कोई आय का साधन नहीं है जबकि पति एक प्रेक्टिसिंग डॉक्टर है और अपनी पत्नी को आर्थिक सहायता देने में सक्षम है। अदालत ने पत्नी को 5500 रुपये प्रति माह भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दिया।