एतिहासिक धरोहर बाल स्कूल में कमरे में बंद जिला पुस्तकालय के लिए आया फर्नीचर । संवाद
मंडी। जिला पुस्तकालय मंडी के लिए चार साल पहले खरीदा 12 लाख रुपये का फर्नीचर बाल स्कूल के एक बंद कमरे में कैद है। अपना भवन न होने के कारण चार साल पहले पुस्तकालय को बाल स्कूल में शिफ्ट करने की कवायद चली थी। इसके बाद स्कूल में कुर्सियां और टेबल पहुंचाए गए थे, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ पाई और फर्नीचर अब बंद कमरे में धूल फांक रहा है।
वर्तमान में जिला पुस्तकालय पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पुराने भवन में चल रहा है, जहां जगह की कमी के कारण किताबों को सही तरीके से संजोने में भी समस्या हो रही है। पुस्तकालय में किताबों के लिए जगह की कमी है। इस वजह नई किताबें भी नहीं मंगवाई जा रही हैं। इसके कारण साहित्य, उपन्यास और अन्य पठन सामग्री के लिए उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है।
पाठकों को पढ़ाई के लिए मुश्किल से जगह मिलती है और अधिकतर छात्रों को दूसरी शिफ्ट का इंतजार करना पड़ता है। एक समय में यहां केवल 73 अभ्यर्थी ही पढ़ाई कर पाते हैं। चार साल पहले जिला पुस्तकालय को बाल स्कूल भवन में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फर्नीचर भी खरीदा गया।
मगर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले बाल स्कूल के ऊपरी तल में किताबों और अलमारियों के वजन से भवन को नुकसान पहुंचने का खतरा बताया गया। इसके बाद पुस्तकालय प्रशासन ने स्कूल के धरातल पर स्थान उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था। इसके बाद बाल स्कूल में पार्किंग और शॉपिंग मॉल का निर्माण कार्य शुरू हो गया। वहीं, बाल स्कूल के नए भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इसके बाद ही पुस्तकालय को नए भवन में शिफ्ट किया जा सकेगा।
जहां वर्तमान में पुस्तकालय है, वहां पाठक शोर-शराबे में पढ़ाई कर रहे हैं। जब भी उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक को कोई ज्ञापन सौंपने जाता है तो सबसे पहले पुस्तकालय के सामने ही नारेबाजी होती है। इससे पाठकों को काफी परेशानी आती है। संवाद
एतिहासिक धरोहर बाल स्कूल में कमरे में बंद जिला पुस्तकालय के लिए आया फर्नीचर । संवाद