कुंडूनी में भूस्खलन से 10 बीघा कृषि भूमि तबाह, 38 मकानों पर अब भी मंडरा रहा खतरा
राहत-बचाव कार्य तेज करने पर बनी रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नेर घरवासड़ा पंचायत के कुंडूनी गांव में पिछले वर्ष आई आपदा के बाद स्थिति अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। भूस्खलन और पानी के तेज बहाव से करीब 10 बीघा कृषि भूमि तबाह होने का दावा करते हुए प्रभावित किसानों ने सरकार से वैकल्पिक भूमि उपलब्ध करवाने की मांग की है। वहीं, खतरे की जद में आए 38 मकानों में रह रहे परिवारों ने सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास और पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई है। नेर घरवासड़ा पंचायत में आयोजित आपदा प्रभावित परिवारों की आम सभा में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से लंबित कार्यों में तेजी लाने के साथ-साथ भविष्य में संभावित खतरे को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष गुलाब सिंह ने बताया कि बीते मानसून के दौरान कुंडूनी गांव में आई त्रासदी में 10 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे, जबकि 38 मकान अभी भी खतरे की स्थिति में हैं। प्रभावित परिवारों को अब तक अपेक्षित आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है।
मझारनू-कुफरू सड़क से वर्षा जल की उचित निकासी नहीं होने के कारण गांव में दोबारा आपदा का खतरा बना हुआ है। करीब 80 से 90 फीट लंबी कृत्रिम झील भी कई मकानों के लिए खतरा बनी हुई है। बैठक में कश्मीर सिंह, बीना, प्रियंका, सीमा, सुमना, चमन लाल, देवेंद्र, हरि सिंह, नेत्र, प्रेम चंद, ब्रह्मी देवी, मुनी देवी, आर्यन, अंकित और भादरी देवी सहित अन्य प्रभावित परिवारों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से पुनर्वास, पर्याप्त मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग उठाई। वहीं, तहसीलदार जोगिंद्रनगर रजत सेठी ने कहा कि कुंडूनी गांव के आपदा प्रभावित परिवारों को सरकार और प्रशासन की योजनाओं के तहत राहत उपलब्ध करवाने के प्रयास जारी हैं।