थुनाग (मंडी)। सिविल कोर्ट भवन चच्योट में दिव्यांगों के लिए रैंप और लिफ्ट की सुविधा नहीं है। पेशी के लिए आने वाले दिव्यांगों को कोर्ट रूम तक पहुंचने के लिए दो दर्जन सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, सरकारी भवनों में दिव्यांगों के लिए रैंप का होना अनिवार्य है। साथ ही लिफ्ट भी होनी जरूरी है। वीरवार को टेक सिंह नामक व्यक्ति की कोर्ट में पेशी थी।
वह गेट पर बनी पहली सीढ़ी ही नहीं चढ़ पाए। उसने बताया कि उसकी दोनों टांगें खराब हैं और सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नवनीत वशिष्ठ ने कहा कि सरकारी भवनों में दिव्यांगों के लिए रैंप का होना जरूरी है। यह दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें समान अवसर प्रदान करने के लिए आवश्यक है। इस बारे में लोक निर्माण विभाग को अवगत करवाएंगे।
रैंप की सुविधा न होने पर कानूनी कार्रवाई संभव
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार यदि कोई दिव्यांग रैंप की सुविधा न होने के कारण किसी सरकारी भवन में प्रवेश नहीं कर पाता है, तो वह अपनी शिकायत राज्य या केंद्रीय दिव्यांगजन अधिकार आयोग में दर्ज करा सकता है। यदि कोई सरकारी भवन रैंप की सुविधा प्रदान नहीं करता है, तो आयोग की ओर से जुर्माना लगाया जा सकता है।