टैंक में मछलियों की देखरेख करते दीनानाथ। -स्रोतः विभाग
पधर (मंडी)। उपमंडल पधर की ग्राम पंचायत कुन्नू के सपेड़ी गांव के दीनानाथ ने पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश सरकार की योजनाओं और अनुदान से प्रेरित होकर उन्होंने मछली पालन को स्वरोजगार का साधन बनाया है। अब वह घर पर 300 रुपये प्रतिकिलो मछली बेच रहे हैं।
दीनानाथ ने बताया कि मछली पालन शुरू करने के लिए उन्होंने दो टैंकों का निर्माण किया। पहले टैंक पर 75 हजार रुपये खर्च हुए। इसमें प्रदेश सरकार से 50 फीसदी अनुदान मिला। दूसरे टैंक पर 1.50 लाख रुपये खर्च हुए। इसके लिए 50 फीसदी अनुदान के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि टैंकों में कॉर्प फिश का बीज कृषि विभाग कार्यालय पधर से निशुल्क मिला। इससे चार से छह माह में मछलियां 300-500 ग्राम वजन तक बढ़ गईं।
बताया कि अभी उन्होंने छोटे यूनिट में मछली पालन का कार्य आरंभ किया है। इस यूनिट से मछली का अच्छा उत्पादन हुआ और अब इसे आगे बढ़ाने का सोच रहे हैं। मछलियां घर में ही अच्छे दाम पर 300 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं।
विषयवाद विशेषज्ञ सोनम कुमारी ने बताया कि दीनानाथ को ‘जल से कृषि को बल’ योजना के तहत टैंक निर्माण के लिए 36 हजार रुपये की अनुदान राशि मिली। उन्होंने कहा कि पधर उपमंडल में पांच किसानों को टैंक मरम्मत के लिए 25 हजार रुपये दिए गए हैं। राष्ट्रीय सतत् कृषि योजना के अंतर्गत 1500 किसानों को कृषि व मछली पालन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।