22 वर्ष बाद शिवरात्रि मेले में पहुंचे देव पराशर से मिलने को अधीर हो उठे अन्य देवता।
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मंडी। सांस्कृतिक राजधानी मंडी का ऐतिहासिक शिवरात्रि महोत्सव देव आस्था का महाकुंभ है। सोने और चांदी से बने देव रथों के मंडी पहुंचने पर एक साल के बाद देवी-देवता एक-दूसरे से मिले। देव मिलन के अद्भुत नजारे से मंडी नगर आस्था में डूब गया। इस बार 22 सालों के बाद देव पराशर ऋषि भी शिवरात्रि के देव समागम की शोभा बढ़ाने के लिए मंडी पहुंच गए हैं।
सात दिनों तक चलने वाले देव समागम में देवी-देवताओं के रथ पहुंचने से मंडी शहर भक्तिमय हो उठा। एक साल बाद देवी-देवताओं का मिलन हुआ। पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल नगाड़े, शहनाई, रणसिंगे की धुनों पर देवलू भी देव रथ के साथ नाचते गाते मंडी पहुंचे। देवी-देवताओं और देवलुओं के आगमन से छोटी काशी मंडी में आस्था का महाकुंभ शुरू हो गया। शिवरात्रि महोत्सव में दो सौ से अधिक देवी-देवता और देवलू मंडी वासियों के लिए मेहमान बन कर रहेंगे।
एक साल के बाद मंडी शहर में देव महाकुंभ के लिए सराज, उत्तरशाल, सनोर, गोहर और चौहारघाटी क्षेत्रों से देवी-देवताओं के रथ पहुंचने से मंडी शहर में आस्था का सैलाब भी उमड़ने लगा है। मंडी पहुंचते ही सबसे पहले देवी-देवता राज देवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। उत्तरशाल के प्रमुख देवता पराशर ऋषि और देव माधोराय का 22 सालों के बाद मिलन हुआ। देव पराशर ऋषि के साथ काफी संख्या में देवलू साथ चल रहे थे। शिवरात्रि महोत्सव में देव पराशर ऋषि की छड़ ही आई है। चौहारघाटी के बड़ादेव हुरंग नारायण, देव पशाकोट, देव घड़ौनी नारायण, छतरी के देव मगरू महादेव, चपलांदू नाग, बिठ्ठू नारायण आदि कई प्रमुख देवता भी शुक्रवार को मंडी पहुंचे।