सुराहण काहिका उत्सव में मौजूद श्रद्धालु। स्त्रोत- जागरूक पाठक
पधर (मंडी)। द्रंग विधानसभा क्षेत्र की डायनाबाड़ पहाड़ी शनिवार को आस्था, श्रद्धा और देव संस्कृति से सराबोर हो उठी। चौहार घाटी के अधिष्ठाता राजा बड़ादेयो देव हुरंग नारायण के आगमन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। चार वर्षों के अंतराल के बाद शुरू हुए सुराहण रूहाड़ा काहिका उत्सव का शुभारंभ देव परंपराओं के साथ हुआ, जो तीन दिनों तक उल्लासपूर्वक मनाया जाएगा।
दोपहर को देव हुरंग नारायण ने सूखा नारायण खूह की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। संध्या होते ही देव रथ ने भव्य शोभायात्रा के रूप में सुराहण गांव की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान समूची पहाड़ी देव धूंध में लिपटी रही। स्नेड नारला गांव से किशोरी लाल का परिवार परंपरा अनुसार विशेष रश्म निभाने पहुंचा। देव खेल के दौरान गूरों ने भी शक्ति प्रदर्शन किया।
सुराहण गांव पहुंचने पर देव सूत्रधारी ब्रह्मा के कारदारों और स्थानीय लोगों ने वाद्ययंत्रों के साथ देव रथ का स्वागत किया। जोगिंद्रनगर के हराबाग गांव से नड़ परिवार के सदस्यों ने पैदल यात्रा कर देवता से आशीर्वाद प्राप्त किया। शनिवार रात को काहिका स्थली पर मुरगण अनुष्ठान और चारवेद सजाने की रस्म अदा की जाएगी। इसके लिए फूटाखल जंगल से देवदार के चार छोटे वृक्ष लाए जाएंगे, जिनके नीचे हुरंग नारायण का प्राचीन भेखले का मोहरा स्थापित किया जाएगा।
रविवार सुबह पवित्र चारवेद स्थल पर नड़ समुदाय के पंडित मंत्रोच्चारण के साथ देव हुरंग नारायण का छिद्रा करेंगे। इसके उपरांत श्रद्धालु भी पापमुक्ति के लिए नड़ों से छिद्रा करवा सकेंगे। अंतिम दिन सोम दत्त उर्फ गुड्डू नड़ देव शक्ति से मूर्छित होंगे और उनकी प्रतीकात्मक अर्थी पूरे गांव में घुमाई जाएगी। अंत में देव जागरण के साथ उनके पुनर्जीवित होने पर यह ऐतिहासिक काहिका उत्सव संपन्न होगा।