सरकाघाट (मंडी)। हिमाचल किसान सभा और सीटू से संबद्ध मनरेगा निर्माण मजदूर यूनियन ने मंगलवार को सरकाघाट में संयुक्त प्रदर्शन कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। संगठनों ने तहसीलदार के माध्यम से पांच अलग-अलग मांगपत्र एसडीएम को सौंपे। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं सीटू मंडी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, किसान सभा के रणताज राणा, दिनेश काकू, प्रकाश वर्मा, सोहन सिंह और मान सिंह ने किया।
भूपेंद्र सिंह ने बताया कि अवाहदेवी–सरकाघाट–धर्मपुर–मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग का निर्माण कार्य बरसात के दो माह बाद भी शुरू न होने पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई। उन्होंने कहा कि जो कार्य अब तक हुआ है वह बेहद खराब गुणवत्ता का है और सुधार के लिए कंपनी प्रबंधन तथा मोर्थ के साथ तत्काल बैठक बुलाकर स्पॉट इंस्पेक्शन किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने किसानों की बेदखली रोकने तथा सरकारी भूमि पर बने आवास तोड़ने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से 21 नवंबर से लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग उठाई गई। इसी के साथ राज्य सरकार की स्थायी नौकरियों के स्थान पर सेवा मित्र भर्ती नीति का भी कड़ा विरोध किया गया।
मजदूर यूनियन ने मनरेगा में वर्ष में 200 दिन का रोजगार और 500 रुपये दिहाड़ी तय करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में सौ दिन की रोजगार गारंटी भी पूरी नहीं हो रही और मजदूरों को केवल 40-50 दिन का ही काम मिल पा रहा है। राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की सहायता पिछले तीन वर्षों से बंद होने पर भी रोष जताया गया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकाघाट नगर परिषद क्षेत्र तथा अन्य स्थानों में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटरों का विरोध किया। साथ ही युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सुनिश्चित करने और आउटसोर्स आधारित नियुक्तियों को समाप्त करने की मांग की।