फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

33 वर्ष बाद मिले सगे भाई देव केउली नारायण और बायला नारायण

Sun, 03 Jul 2016 06:44 PM IST
ब्यूरो मंडी
विज्ञापन
देव मिलन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
थुुनाग (मंडी)। बीस षाढ़की मेले जंजैहली में 33 साल बाद सगे भाइयों देव केउली नारायण और बायला नारायण का मिलन हुआ। दशकों बाद देव केउली नारायण अपने भाई बायला नारायण के मेले में शरीक हुए। मेेले में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की देव ध्वनि पर हुए देव मिलन से माहौल देवमय हो गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवता के देवलुओं का उत्साह और उल्लास देखते ही बन रहा था। वाद्य यंत्रों की देव ध्वनि पर सैकड़ों देवलुओं के साथ ही हजारों लोग भी झूम उठे।
विज्ञापन

   देव केउली नारायण लगभग साढ़े तीन दशक बाद अपने भाई बायला नारायण के मेले में शरीक हुए।

देव के कटवाल ज्योति प्रकाश ने कहा कि 33 साल पहले देव केउली नारायण अपने भाई बायला नारायण के मेले में दीवाली मेले में शरीक होने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान देव के गुर हीरा लाल थे। वहीं, वर्तमान में देव के गुर लाल सिंह है। देव बायला नारायण के गुर ने छड़ी भेज कर देव को निमंत्रण दिया था। जिसके बाद देव केउली नारायण 200 देवलुओं और 20 बंजतरियों के साथ मेले में शरीक हुए। मेले में देव लंबाथाच से होते हुए जंजैहली पहुंचे। मेले में केउली नारायण और बायला नारायण देव गड़ौलू देवी दूलासन के भव्य देव मिलन से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। ढोल नगाड़ों की थाप पर देव मिलन के साथ श्रद्धालु झूम उठे। जंजैहली बाजार से होते हुए स्कूल के खेल मैदान से होकर बायला तक भव्य जलेब भी निकाली गई। जलेब में 1000 से अधिक लोगों ने शिरकत की। इसके बाद देवता देव बायला नारायण के मूल स्थान खणीबाग में विराजमान हुए। देव केउली नारायण के साथ आए देवलुओं को मेहमान (पगलू) के रूप में हर घर में भेजा गया। इस दौरान मेजबानों परिवारों ने देवलुओं का खूब आदर सत्कार किया। बायला में पुल न बनने से देवताओं को ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, धरवाड़थाच का देव विष्णु मतलोड़ा 20 षाढ़की मेले का शुभारंभ सोमवार को होगा। तीन दिवसीय मेले में वॉलीबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। मेले में देवी दुलासन, देव भुजाऋषि आदि शिरकत करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें