थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं। लोग मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। इससे जलजनित रोगों के पनपने की आशंका है। निहारी के सोहन, चतर सिंह, रीना देवी, रीता देवी, जरोल के बालक राम और ढमेसर का कहना है कि स्वच्छ पानी की कमी ने उनके लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है। दूषित पानी के सेवन से हैजा, पेचिश और टायफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, जो विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है।
निहारी की रीना देवी ने बताया कि उन्हें नाले का पानी पीना पड़ रहा है। जरोल के बालक राम ने कहा कि उनके गांव में पानी के पाइप टूट गए हैं। वैकल्पिक स्रोत भी दूषित हैं। ढमेसर ने कहा कि हमें दवाएं और साफ पानी चाहिए, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं। सोहन, चतर सिंह ने बताया कि कुछ स्थानों पर टैंकर पानी पहुंचा रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। सामूहिक प्रयासों से जलजनित रोगों को रोकने और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की जरूरत है।
उधर, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार ने राहत टीमें भेजी हैं और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था शुरू की है। जंजैहली के बीएमओ डॉ. पुष्पराज ने इस संकट पर चिंता जताई। कहा कि पानी को उबालकर पीएं, कच्चे खाद्य पदार्थों से परहेज करें और साबुन से नियमित रूप से हाथ धोना जरूरी है। संवाद