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शहादत पर फख्र, आंखों में आंसू; अमर रहे राजकुमार

Mon, 22 Feb 2016 11:22 PM IST
जितेंद्र ठाकुर जोगिंद्रनगर (मंडी)।
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 रोते-बिलखते परिजनों की चीखों से भराडू गांव में मातम सा छा गया। दोनों बेटियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जहां राजकुमार की मौत से परिवार और गांव में मातम का माहौल है, वहीं बेटियों, पत्नी, माता और दादी को जांबाज राजकुमार राणा की शहादत पर गर्व है।
शहीद राजकुमार राणा की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अंशिता आठवीं कक्षा और छोटी बेटी कशिश पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। अंशिता ने कहा कि पापा चाहते थे कि वह बड़ी होकर डाक्टर बने। देश की रक्षा के लिए पिता की शहादत पर गर्व है। पिता के इस सपने को जरूर पूरा करूंगी। अंशिता ने कहा कि पिता ने जो सपने उनके लिए देखे थे। वे अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उनके सपनों को साकार करेंगी। दिसंबर माह में पिता घर आए थे और वापस जाती बार उन्होंने चचेरी बहन की शादी में चार मार्च को घर आने को कहा था।
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जोगिंद्रनगर उपमंडल के भराड़ू गांव निवासी शहीद राज कुमार राणा सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर 1999 में भर्ती हुए थे। राजकुमार काहनवाही लेकर जम्मू से श्रीनगर के लिए काफिले में चल रहा था। पांपोर के पास आतंकियों ने काफिले पर हमला कर दिया। जिसमें काहनवाही चला रहे हवलदार राजकुमार राणा के सीने में तीन गोलियां लगने से वे शहीद हो गए। सुबह से ही शहीद के घर पास परिजनों को ढांढस बांधने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ था। पार्थिक शव पहुंचते ही दोनों बेटियां, पत्नी, माता व दादी फूट-फूट कर रो पड़े।
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