गोहर उपमंडल के कमरूनाग घाटी के जंगल में लगी भीषण आग।
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चार दिन से नाचन और सुकेत वन मंडल की कुटाहची और चच्योट बीट के सरोआ और कमरूनाग जंगलों में भीषण आग से करोड़ों की वन संपदा राख हो गई है। करीब एक हजार हेक्टेयर से अधिक का जंगल राख हो गया है। सैकड़ों जीव जंतु आग की भेंट चढ़ गए हैं और बुरांस, सेब और काफल के हजारों फलदार पेड़ भस्म हो गए हैं।
आग के कारण पानी के पाइपें जलने से कुटाहची गांव में दो दिन से पेयजल आपूर्ति ठप है। बिजली की तारें टूटने से कुटाहची गांव में दो दिन अंधेरा छाया रहा। ग्रामीणों और स्थानीय विधायक की सूचना पर दमकल विभाग की गाड़ी भी रविवार शाम को सरोआ पहुंची, मगर मात्र औपचारिकता के उपरांत बिना आग बुझाए वापस लौट गई।
इसका ग्रामीणों में आक्रोश है। दमकल कर्मियों ने पाइप नहीं लाई और सड़क से पानी का प्रेशर मारकर एक जगह टैंकर खाली कर दिया। इसके बाद रात भर आग जलती रही। कुटाहची गांव के ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पा लिया। उधर, फनगयार और खनैबरू गांव के ग्रामीणों ने भी आग बुझाने में वन कर्मचारियों की मदद की। ठूंठ में लगी आग बार-बार जंगलों को जला रही है, जिससे आग पर पूर्ण रूप से काबू नहीं पाया जा सका है।
कमरूघाटी में आग पर काफी हद तक काबू
सोमवार को गोहर से खंड विकास अधिकारी गुलाब चंद बैंस और तहसीलदार बल्ह जय गोपाल शर्मा और उनके स्टाफ ने कुटाहची गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ आग बुझाई और स्थिति का जायजा लेकर उपायुक्त मंडी को रिपोर्ट सौंपी। कुटाहची बीट के वन रक्षक मनीष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से कमरूघाटी के जंगलों में लगी आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। वन परिक्षेत्राधिकारी बासा कर्मचंद और बीओ तपेंद्र नेगी ने बताया कि सरोआ के जंगल में आग को नियंत्रित कर दिया है। एसडीएम गोहर राघव शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के जंगलों में लगी आग बुझाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।